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राहु दोष को शांत करने और सुख-समृद्धि के लिए राहु गायत्री मंत्र अत्यंत प्रभावशाली है। नियमित रूप से 108 बार इसका जाप करने से राहु की महादशा, कालसर्प दोष और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। मुख्य राहु गायत्री मंत्र: "ॐ शिरो रूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहु प्रचोदयात" अन्य प्रचलित मंत्र: "ॐ नीलवर्णाय विद्महे सैंहिकेयाय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात्" जप विधि और लाभ: विधि: शनिवार को राहु यंत्र या राहु देव की तस्वीर के सामने, नीले या काले कपड़े पहनकर, 108 बार रुद्राक्ष की माला से जाप करें। लाभ: यह मानसिक तनाव, अचानक आने वाली मुसीबतें, मानसिक भ्रम और अनिश्चितता को कम करने में सहायक है। समय: शाम के समय या राहु काल (दिन का 8वां भाग) में इसका जाप करना अत्यंत उत्तम माना जाता है। सावधानी: मंत्र का जाप 40 दिनों की अवधि में 18,000 बार (राहु मंत्र की दीक्षा के अनुसार) किया जाना सर्वोत्तम है। राहु के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए शनि देव या काल भैरव की पूजा भी की जा सकती है।