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यह भजन सद्गुरु कृपा, पूर्ण समर्पण और आत्म-विलय (Self-Realization) का जीवंत अनुभव है। जहाँ सुख-दुख, जन्म-मृत्यु, मैं-तू सब लीन हो जाते हैं — और केवल सच्चिदानंद, प्रेम और सोऽहम् की स्थिति शेष रह जाती है। यह कोई साधारण भजन नहीं, यह एक आत्मकथा है — जहाँ साधक कहता है: “मैं कुछ नहीं, मेरा कुछ नहीं — सब सद्गुरु के चरणों में।” श्रवण करें, ध्यान करें, और अपने भीतर उस मौन को अनुभव करें जहाँ हरि हरि स्वयं गूंजता है। 🌸 🎶 Lyrics 🎶 सद्गुरु चरणे धोए हर जनम में, उनकी सेवा में जीवन लेन। उनकी कृपा से दुख सब छूटे, सुख भी छूटे — बंधन टूटे। नाही रे रे कोई चाह यहाँ, इस सच्चिदानंद में वास यहाँ। मोह-माया से अब मुक्त हुए, अब लौटने की राह नहीं यहाँ। सोऽहम्… सोऽहम्… हरि हरि… हरि हरि… शून्य है मेरा अस्तित्व अब, ना मैं हूँ, ना मेरा भाव। ना माया शेष, ना माया का भय, सब लीन हुआ — मिटा हर घाव। जो छूटे वही तो छूटे सखा, जो थामा था अहंकार में। जो पाया वो सद्गुरु चरण मिला, जीवन बहा उपकार में। सोऽहम्… सोऽहम्… हरि हरि… हरि हरि… ना जन्म का भय, ना मृत्यु का शोर, ना समय की कोई चाल। जहाँ नाद ब्रह्म गूंजे नित, वहाँ मौन ही बन जाए सवाल। सद्गुरु दृष्टि जो पड़ जाए, कट जाए कर्मों का फेर। एक क्षण में मिट जाए युग, बस रह जाए प्रेम का घेर। सोऽहम्… सोऽहम्… हरि हरि… हरि हरि… ना मैं भक्त, ना ईश्वर अलग, ना पूजा, ना पुजारी। जिसने जाना, वही जान सका, यह लीला है अगाध, निराली। सागर हूँ मैं, बूँद नहीं, लहर भी मेरी ही चाल। जो खोजे बाहर, भटके सदा, जो भीतर झाँके — महाकाल। सोऽहम्… सोऽहम्… हरि हरि… हरि हरि… सद्गुरु चरण ही तीर्थ मेरे, सद्गुरु वचन प्रमाण। इन्हीं में जन्म, इन्हीं में लय, इन्हीं में मेरा निर्वाण। न कुछ पाना, न कुछ खोना, बस होना — जैसा हूँ। सच्चिदानंद, प्रेम स्वरूप, अनंत में लीन — सोऽहम् हूँ। सोऽहम्… सोऽहम्… हरि हरि… हरि हरि… #Soham #HariHari #SadguruKripa #GuruBhakti #SohamMantra #AdvaitaBhajan #NonDuality #SelfRealization #SpiritualSong #BhaktiGeet #IndianSpirituality #MeditativeBhajan #SantVani #Satsang #Sachchidananda #InnerJourney #Moksha