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विष्णु पुराण के प्रथम अंश का सत्रहवां अध्याय (सप्तदश अध्याय) भक्त प्रह्लाद के चरित्र का सबसे रोमांचक और हृदयविदारक भाग है। इस अध्याय में दिखाया गया है कि कैसे एक पिता (हिरण्यकशिपु) अपने ही पुत्र को मारने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर देता है, और कैसे नारायण की भक्ति हर प्रहार को विफल कर देती है। प्रह्लाद पर हाथियों और सांपों का वार! | मौत के हर प्रयास को भक्ति ने कैसे जीता? | विष्णु पुराण अध्याय 17 विष्णु पुराण के इस 17वें अध्याय में अधर्म और धर्म का वो भीषण संघर्ष है, जहाँ पाँच साल के बालक प्रह्लाद पर काल बनकर उसके अपने पिता टूटे। लेकिन जिसके हृदय में स्वयं 'हरि' हों, उसका काल भी क्या बिगाड़ सकता है? इस वीडियो में आप जानेंगे: दिग्गजों का प्रहार: जब मतवाले हाथियों ने प्रह्लाद को कुचलने की कोशिश की। विषधरों का वार: कालिया जैसे विषैले सर्पों के बीच प्रह्लाद की शांति। असुरों के शूल: जब राक्षसों के शस्त्र प्रह्लाद के शरीर को छूते ही टूट गए। नारायण स्मरण की शक्ति: प्रह्लाद ने कैसे कष्टों के बीच भी ईश्वर का अनुभव किया। भक्ति की इस पराकाष्ठा को सुनकर आपकी आँखों में आँसू और मन में श्रद्धा भर जाएगी। || जय श्री कृष्ण || भक्त प्रह्लाद का 'नारायण कवच' | क्या है अटूट विश्वास की शक्ति? | विष्णु पुराण अध्याय 17 विष्णु पुराण के सत्रहवें अध्याय की कथा केवल एक बालक के बचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह 'योग' और 'ध्यान' की सर्वोच्च स्थिति का वर्णन है। इस अध्याय में प्रह्लाद जी ने सिद्ध किया कि भगवान कहीं बाहर नहीं, बल्कि भक्त के विश्वास में हैं। मुख्य चर्चा के बिंदु: भय पर विजय: प्रह्लाद ने मृत्यु के सामने खड़े होकर भी मुस्कुराहट कैसे बनाए रखी? असुरों का हृदय परिवर्तन: क्या प्रह्लाद के तप ने राक्षसों को भी सोचने पर मजबूर किया? शारीरिक कष्ट और मानसिक शांति: विष्णु के ध्यान में मग्न प्रह्लाद का अनुभव। अहंकार की हार: हिरण्यकशिपु की हताशा जब उसका हर षड्यंत्र विफल हुआ। कठिन समय में धैर्य और ईश्वर पर विश्वास कैसे रखें, यह अध्याय हमें यही सिखाता है। वीडियो को लाइक करें और कमेंट में 'नमो नारायण' ज़रूर लिखें! #SpiritualStrength #BhaktiShakti #SanatanDharma #VishnuPuranHindi #Faith #Inspiration #विष्णुपुराण #भक्तप्रह्लाद #नारायणभक्ति #PrahladKatha #VishnuPuran #सत्रहवांअध्याय