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#sardargarh #fort #rajasthan इस किले से दिखाई देता है पाकिस्तान!! सरदारगढ़ का किला!! अस्तित्व खो रहा है 350 वर्ष पुराना सरदारगढ़ का किला राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा पुरामहत्व की इमारतों को संरक्षण नहीं देने के कारण क्षेत्र में बनी प्राचीन इमारतें किले अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। इन्हीं प्राचीन इमारतों किलों में अपना वजूद तलाश रहा है, सरदारगढ़ का किला। 350 वर्ष पुराने इस गढ़ की हालत खस्ता हो चुकी है। सार संभाल नहीं होने के कारण यह किला जर्जर होता जा रहा है। बड़ी प्राचीर, गोलाई युक्त कमरे, निर्माण में चूने का प्रयोग, विशाल आकार की ईंटें, प्राचीरों में बने बड़े झरोखे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कभी यहां एक सुदृढ़ किला हुआ करता था। वक्त के साथ शासन बदले, पीढिय़ां बदली और यह किला अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ता रहा। वर्षा, तूफान झंझावतों के बाद भी किला खंडित होने के बाद भी अहसास दिला रहा है कि कभी यहां सुंदर भव्य राजमहल हुआ करते थे। आज किले की हालत इतनी खराब है कि शेष बची दीवारें कब धाराशाई हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। गढ़ में शेष बचे दो कमरे ही इसके गढ़ होने की जानकारी दे रहे हैं। कभी कभार विदेशी पर्यटक भी आते हैं गढ़ को देखने के लिए कई विदेशी पर्यटक पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। ग्रामीण राहुल ने बताया वर्ष 2014 में एक परिवार सहित पांच विदेशी पर्यटकों ने किले का दौरा किया इसकी बनावट की बारीकी से जानकारी ली। फ्रांस से आए स्टीफन उसके परिजनों ने ग्रामीणों से किले के बारे में जानकारी प्राप्त की। स्टीफन ने दो दिन रुककर किले की वीडियोग्राफी की ढेर सारे फोटो खींचे। टीवी चैनल नेशनल जियोग्राफी की टीम ने भी पहुंच कर किले के भीतरी भागों को देखा परखा। ग्रामीणों ने बताया कि किले में बने पानी के टांके आज भी सुरक्षित हैं। पुरातत्व विभाग ही कर सकता है सार संभाल प्राचीन किले इमारतें पुरातत्व विभाग के अधीन आती हैं, पुरातत्व विभाग ही इनकी सार संभाल करवा सकता हैं! 1665 में बने किले में बीकानेर के शासकों की लगती थी कचहरी! वर्तमान में गढ़ में निवास कर रहे राहुलसिंह बीका ने बताया कि सरदारगढ़ आज से करीब सात सौ साल पहले बीकानेर रियासत के एक निजाम सरदारासिंह ने बसाया था और किले का निर्माण 1665 में हुआ था। यह किला बीकानेर के शासकों की कचहरी हुआ करती थी। अपराधियों को यहां राजदरबार में पेश किया जाता था ऊपर के कक्ष में बैठकर राजा फैसले सुनाया करते थे। सजा देने पर गांव से एक किलोमीटर दूर बने कारागार में अपराधी को भेजा जाता था इसी स्थान पर फांसी की सजा सुनाए अपराधी को फांसी पर लटकाया जाता था। कुछ वर्षों तक सरदारगढ़ में राजाओं की कचहरी लगती रही पर बाद में इस क्षेत्र को बीकानेर रियासत का तालुका भाग घोषित कर दिया गया। playlist 👇👇 • हनुमानगढ़ के पर्यटन स्थल