У нас вы можете посмотреть бесплатно चल साधो A Song from औघड़ | Nilotpal Mrinal | Full Official Song | folk song | daydreamers или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
BUY DARK HORSE : https://amzn.to/3iodPXe BUY AUGHAD : https://amzn.to/3ir5jGR Buy COMBO : https://amzn.to/2VOkS3O iTunes - https://apple.co/3s0HHMr Apple Music - https://apple.co/37jXgXW Hungama - https://bit.ly/37lTsoK Wynk -https://bit.ly/2LYHYAn Spotify - https://spoti.fi/3bhMdQd JioSaavn - https://bit.ly/2ZlpUDD Kkbox - https://bit.ly/3qsGr4v Amazon Prime - https://amzn.to/3jXOPX3 चल_साधो A Song from औघड़ Written and Sung by Nilotpal Mrinal ये गीत औघड़ की भूमिका है।उसका तेवर है।उसकी झलक है। -Nilotpal Mrinal Song Credits : Song: Chal Sadho Singer: Nilotpal_Mrinal Music: Suraj Murmu, Rituraj Kashyap, Md.Taslim (Jugnu Benjo, Bhagalpur), John Christopher Contact No: Jugnu Benjo +919110044106 Lyrics: Nilotpal Mrinal from his book औघड़ Recorded at: Santosh Studio, Dumka, Jharkhand Video Credits: Camera: Daydreamers Team Drone Shots: Tapas Kumar Editing: Anurag Pathak, Manoj Kumar Bhandari, Rituraj Kashyap Cinematography: Nilotpal Mrinal, Anurag Pathak, Rituraj Kashyap Daydreamers Email id: dreamersd60@gmail.com Contact: +919110158041 Keywords - chal Sadho, Aughad, Nilotpal Mrinal, folk song, daydreamers, Dumka, nirgun About the novel: ‘औघड़’ भारतीय ग्रामीण जीवन और परिवेश की जटिलता पर लिखा गया उपन्यास है जिसमें अपने समय के भारतीय ग्रामीण-कस्बाई समाज और राजनीति की गहरी पड़ताल की गई है। एक युवा लेखक द्वारा इसमें उन पहलुओं पर बहुत बेबाकी से कलम चलाया गया है जिन पर पिछले दशक के लेखन में युवाओं की ओर से कम ही लिखा गया। ‘औघड़’ नई सदी के गाँव को नई पीढ़ी के नजरिये से देखने का गहरा प्रयास है। महानगरों में निवासते हुए ग्रामीण जीवन की ऊपरी सतह को उभारने और भदेस का छौंका मारकर लिखने की चालू शैली से अलग, ‘औघड़’ गाँव पर गाँव में रहकर, गाँव का होकर लिखा गया उपन्यास है। ग्रामीण जीवन की कई परतों की तह उघाड़ता यह उपन्यास पाठकों के समक्ष कई विमर्श भी प्रस्तुत करता है। इस उपन्यास में भारतीय ग्राम्य व्यवस्था के सामाजिक-राजनितिक ढाँचे की विसंगतियों को बेहद ह तरीके से उजागर किया गया है। ‘औघड़’ धार्मिक पाखंड, जात-पात, छुआछूत, महिला की दशा, राजनीति, अपराध और प्रसाशन के त्रियक गठजोड़, सामाजिक व्यवस्था की सड़न, संस्कृति की टूटन, ग्रामीण मध्य वर्ग की चेतना के उलझन इत्यादि विषयों से गुरेज करने के बजाय, इनपर बहुत ठहरकर विचारता और प्रचार करता चलता है। व्यंग्य और गंभीर संवेदना के संतुलन को साधने की अपनी चिर-परिचित शैली में नीलोत्पल मृणाल ने इस उपन्यास को लिखते हुए हिंदी साहित्य की चलती आ रही सामाजिक सरोकार वाली लेखन को थोड़ा और आगे बढ़ाया है। About the Author साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल21वीं सदी की नई पीढ़ी के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखकों में से एक हैं, जिनमें कलम के साथ-साथ राजनैतिक और सामाजिक मुद्दों पर ज़मीनी रूप से लड़ने का तेवर भी हैं। इसीलिए इनके लेखन में भी सामाजिक विषमताएँ, विडंबनाएँ और आपसी संघर्ष बहुत स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होते हैं। ‘औघड़’ नई वाली हिंदीके वितान का एक नया विस्तार है।