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श्रीमद् भगवद् गीता जीवनको मार्गदर्शन गर्ने अद्भुत ग्रन्थ हो, जसले युद्धभूमि कुरुक्षेत्रमा अर्जुन र भगवान् कृष्णबीचको संवाद मार्फत मानव जीवनका मूल प्रश्नहरूको समाधान प्रस्तुत गरेको छ। गीता अनुसार योग केवल शारीरिक अभ्यास वा ध्यान साधना होइन; यो चित्त, वाणी र कर्मलाई सन्तुलित गर्दै आत्मालाई परमात्मासँग जोड्ने प्रक्रिया हो। योगले मानिसलाई जीवनका सुख–दुःख, लाभ–हानि, जय–पराजय जस्ता अनुभवहरूमा समभाव राख्न सिकाउँछ, जसले मानसिक स्थिरता र आध्यात्मिक उन्नतिको बाटो खुलाउँछ। गीता विभिन्न योगमार्गहरू—कर्मयोग, ज्ञानयोग र भक्तियोग—मार्फत सम्पूर्ण जीवनलाई साधनशील बनाउने उपाय बताउँछ। कर्मयोगले कर्ममा आसक्ति त्यागेर कार्य गर्ने कला सिकाउँछ, ज्ञानयोगले आत्मा र चित्तको गहिरो बोध गराउँछ, र भक्तियोगले हृदयबाट भगवान् प्रति पूर्ण प्रेम र समर्पण उत्पन्न गर्छ। यसरी योगले व्यक्ति मात्र होइन, उसको कर्म, मन र भक्ति सबैलाई एकसूत्रमा बाँधेर आत्मसाक्षात्कार र मोक्ष प्राप्तिको मार्ग देखाउँछ।