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Inauguration of New Library at Shirdi |Shri Sainath Prabha |Shri Sai Leela | Chandra Bhanu Satpathy श्री गुरु द्वारा बोले गए अनमोल वचन, उपदेश, किस्से एवं कहानिया, जीवन भर उनके भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं और समय-समय पर उन्हें मानसिक रूप से सहायता प्रदान करते हैं। श्री गुरु के सच्चे भक्त ही उन वचनों एवं वाक्यो के महत्व को समझते हुए उनका संकलन करके रखते हैं। श्री साईंबाबा के जीवन काल में भी, उनके रहते हुए श्री साईनाथ प्रभा नामक प्रत्रिका प्रकाशित हुई एवं उनके महासमाधि लेने के कुछ वर्षों बाद ही, श्री साईलीला नामक पत्रिका प्रकाशित हुई, जो हर एक साई भक्त के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण एवं ज्योती स्तंभ की भांति है। डॉक्टर श्री चंद्रभानु सतपथी जी द्वारा, इन अति महत्वपूर्ण पत्रिकाओं को, बहुत ही कठिनाई के साथ, खोज खोज कर, एवं उनका समुचित प्रकार से संरक्षण करके उनको उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित एक, सुव्यवस्थित और सुनियोजित लाइब्रेरी में उचित स्थान दिया गया। उनकी, इन पत्रिकाओं की खोज एवं उनके संरक्षण में, उनको बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पडा, क्योंकि यह पत्रिकाएं किसी अन्य स्थान पर उपलब्ध ही नहीं थी, और सोशल मीडिया का दौर ना होने के कारण, उनकी खोजबीन भी इतनी आसान नहीं थी। ऐसे मे उनके द्वारा, इन महत्वपूर्ण पत्रिकाओं की खोज, एवं उनके संरक्षण का यह कार्य, उनके लिए आसान ना होकर, बहुत ही चुनौतीपूर्ण था, और जिसके लिए, उन्होने हर संभव प्रयास करते हुये उसको खोज ही निकाला जो कि किसी तपस्या से कम नहीं था। इसी कडी में, दिनांक 27 फरवरी, 2025 गुरुवार का दिन, एक ऐतिहासिक दिन था। जब श्रद्धेय डॉक्टर चंद्रभानु सतपथी जी ने अपने गत 40 वर्षों के प्रयत्न से एकत्रित श्री साईनाथ महाराज की अमूल धरोहर श्री साईनाथ प्रभा एवं श्री साईलीला पत्रिकाओं को, श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी को सौपा. इस गरिमामय दिन की शुरुआत, डॉक्टर सतपथी जी द्वारा, शिर्डी के 'श्री साईनाथ छाया' इमारत स्थित, श्री साईबाबा पुस्तकालय के, उद्घाटन के साथ हुई. जिसका फीता काटने के उपरांत, उन्होंने विधिवत्त पूजा अर्चना के साथ. कार्यक्रम का शुभारंभ किया। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, श्री राजीव जोशी जी द्वारा, डॉक्टर सतपथी जी का संक्षिप्त परिचय देने के साथ साथ, एक वीडियो प्रस्तुति भी दी गई. फिर, श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी के मुख्या कार्यकारी अधिकारी, श्री गोरक्ष गाडिलकर जी द्वारा, इस पावन एवं अमूल्य भेंट के लिए. डॉक्टर सतपथी जी का, आभार व्यक्त किया गया। उसके उपरान्त डॉक्टर सतपथी जी द्वारा सन 1919 की श्री साईनाथ प्रभा, एवं श्री 1923 की, श्री साईलीला की बहुमूल्य प्रतियो को, श्री गाडिलकर जी को सौंपा गया, तत्पश्चात श्री गाडिलकर जी ने, डॉक्टर सतपथी जी को एक शाल, श्री साईबाबा की मूर्ति व स्मृति चिह्न देकर, उनका। तथा उनके साथ मे आए सभी लोगो का सम्मान किया। एक प्रेस वार्ता के साथ, इस कार्यक्रम का समापन हुआ. तथा मध्यान आरती के पश्चात, श्री साईबाबा समाधि मंदिर में डॉक्टर सतपथी एवं श्री गाडिलकर जी द्वारा, इन पत्रिकाओं को, श्री साईबाबा के चरणों में अर्पित किया गया। शिरडी में, श्री साईबाबा का पुस्तकालय, एक दीर्घकालीन, प्रितिक्षित पल था, जो की, श्रध्येय डॉक्टर सतपथी जी की प्रेरणा व मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमे श्री गाडिलकर जी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। यह पुस्तकालय, सभी श्री साई भक्तों एवं आने वाली पीढियों के लिए श्री साईबाबा से संबंधित दुर्लभ सामग्री, एवं जानकारियों को एकत्रित करने मे अपनी अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा एवं इस पुनीत कार्य में डॉक्टर सतपथी जी के योगदान को इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। जय श्री साई।