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sec 18-20👉 • Limitation Act Sec 18–20 Explained लेखबद्... Limitation Act sec 13,14&15 Explained • Limitation Act, 1963: Sections 13, 14 & 15... धारा 17: धोखे या भूल के कारण समय का विस्तार (Extension of Time due to Fraud or Mistake) आम तौर पर, मुकदमा करने की समय सीमा (Limitation Period) तब शुरू होती है जब 'Cause of Action' (कारण) उत्पन्न होता है। लेकिन, धारा 17 एक अपवाद है जो यह सुनिश्चित करती है कि किसी के साथ धोखाधड़ी (Fraud) या गलती (Mistake) होने पर न्याय न रुके। 1. इसका मतलब है कि मुकदमा करने का समय तब से गिना जाएगा जब आपको धोखाधड़ी या गलती का पता चलता है, न कि तब से जब वह धोखाधड़ी वास्तव में हुई थी। उदाहरण के लिए: यदि किसी ने 2022 में आपके साथ धोखाधड़ी करके आपकी संपत्ति हड़प ली, लेकिन आपको इसकी जानकारी 2026 में मिली, तो समय सीमा 2022 से नहीं, बल्कि 2026 से शुरू होगी। 2. महत्वपूर्ण शर्तें (Conditions) धारा 17 का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें पूरी होनी चाहिए: धोखाधड़ी साबित करना: आपको अदालत में यह साबित करना होगा कि वादी (Defendant) ने वास्तव में धोखाधड़ी की थी। उचित सतर्कता (Due Diligence): यदि आप थोड़ी सी सावधानी बरतते तो आपको धोखाधड़ी का पता पहले चल सकता था, तो अदालत आपको इस धारा का लाभ नहीं देगी। यह साबित करना होगा कि आपने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। 3. तीसरे पक्ष के अधिकार (Rights of Third Parties) यह धारा निर्दोष लोगों की भी रक्षा करती है। यदि धोखाधड़ी करने वाले ने संपत्ति किसी ऐसे तीसरे व्यक्ति को बेच दी है जिसे इस धोखे के बारे में कुछ नहीं पता था (Bona fide purchaser for value), तो आप उस तीसरे व्यक्ति से संपत्ति वापस नहीं मांग सकते। ऐसी स्थिति में, आप केवल धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति से मुआवज़ा (Compensation) मांग सकते हैं।