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महाशिवरात्रि महा पर्व पर शिव शंभू की महिमा, विशेष रिपोर्ट रुद्राक्ष धाम वांकल वलसाड़ गुजरात से महाशिवरात्रि हर भोले के भक्त के लिए बेहद खास दिन होता है, क्योंकि इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव परिणय सूत्र में बंधे थे. इस दिन भक्त व्रत-पूजन करते हैं और सुख-समृद्धि के साथ ही अपने रिश्ते की मजबूती के लिए कामना करते हैं. हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि का व्रत किया जाता है तो वहीं साल में एक बार त्योहार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि सेलिब्रेट की जाती है. भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह का ये दिन बेहद पावन है. इस दिन लोग व्रत रखने से लेकर मंदिर में दर्शन करने जाते हैं और रात्रिजागरण भी किया जाता है. ये दिन प्रेम, संयम को सिखाता है साथ ही ऊर्जा का संचार करता है. इस खास दिन पर आप अपने करीबियों को कुछ भक्ति से सराबोर कोट्स के जरिए विश कर सकते हैं. रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसू (रुद्र+अक्ष) से उत्पन्न एक पवित्र बीज है, जिसे आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और सुरक्षा के लिए पहना जाता है। मुख्य रूप से नेपाल और भारत में पाए जाने वाले इस बीज का उपयोग माला (108 मोती) या लॉकेट के रूप में किया जाता है। यह तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। रुद्राक्ष के प्रमुख प्रकार और महत्व (Types of Rudraksha) रुद्राक्ष के दानों पर बनी धारियों को 'मुख' कहते हैं। 1 से 14 मुखी तक के रुद्राक्ष सामान्यतः पाए जाते हैं: एक मुखी: साक्षात् शिव का स्वरूप, सर्वोच्च आध्यात्मिक उन्नति के लिए। दो मुखी: अर्धनारीश्वर (शिव-पार्वती) का प्रतीक, मानसिक शांति और रिश्तों में एकता के लिए। तीन मुखी: अग्निदेव का स्वरूप, ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए। चार मुखी: ब्रह्मा का स्वरूप, एकाग्रता और ज्ञान के लिए। पंचमुखी (5 Mukhi): सबसे आम, कल्याण और उत्तम स्वास्थ्य के लिए। सात मुखी: महालक्ष्मी का रूप, धन और समृद्धि के लिए। रुद्राक्ष धारण करने के लाभ (Benefits) स्वास्थ्य: रुद्राक्ष में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गुण होते हैं, जो रक्तचाप को संतुलित करने, तनाव कम करने और हृदय रोग में राहत देने में मदद करते हैं। आध्यात्मिक और मानसिक: यह मन को शांत करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है। एकाग्रता: विद्यार्थियों और साधकों के लिए मन की स्थिरता के लिए अत्यंत लाभकारी। हिन्दू धर्म में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। एक समय था जबकि हम सिर्फ साधु या संतों के गले भी ही रुद्राक्ष की माला पहने देखते थे। फिर अब ऐसा समय हो चला है कि अब कई लोग रुद्राक्ष की माला पहनने हुए दिखाई दे जाएंगे। बहुत से लोग तो अब कलाई में भी रुद्राक्ष की माला पहनने लगे हैं। आओ जानते हैं कि रुद्राक्ष क्या है, कहां से आता है और महाशिवरात्रि पर क्या है इसका महत्व। रुद्राक्ष क्या है : रुद्राक्ष एक वृक्ष का फल है। रूद्राक्ष एक फल का बीज है जो जब पक जाता है तब नीले रंग का दिखाई देता है। इसलिए इसे ब्लूबेरी बीड्स भी कहते हैं। इसके पेड़ को इलियोकार्पस गेनिट्रस भी कहते हैं जो करीब 50 फीट से लेकर 200 फीट तक ऊंचे होते हैं। इस पेड़ में फल लगने में 3 से 4 साल का समय लग जाता है। महाशिवरात्रि पर रुद्राक्ष की महिमा : मूलत: 1 मुखी से लेकर 14 मुखी तक के रुद्राक्ष बाजार में मिलते हैं। इनके अतिरिक्त कुछ विशिष्ट प्रकार के रुद्राक्ष जैसे गौरीशंकर रुद्राक्ष, गणेश रुद्राक्ष, निरमुखी रुद्राक्ष, गर्भ-गौरी रुद्राक्ष भी मिलते हैं। सभी की अलग अलग महिमा का वर्णन मिलता है। #Mahashivratri2026, #Mahadev, #HarHarMahadev, #ShivShakti, #Bholenath. #OmNamahShivaya, #Shivratri2026, #Shiva, #IndianFestivals#Mahashivratri2026, #Shivratri2026, #Mahashivratri #Mahadev, #HarHarMahadev, #Bholenath, #Shiva, #OmNamahShivaya#ShivShakti, #Meditation, #Spirituality, #BhaktiVibe#ReelsIndia, #TrendingReels, #ShivratriNight #happymahashivratri #mahashivratri #shivratri #lordshiva #mahadev #harharmahadev #shiva #bholenath #shiv #omnamahshivaya #mahakal #happyshivratri ... ubnewz2020@gmail.com ubnews64@gmail.com ubnewsglobalnetwork2025@gmail.com Chief Editor Seema Bhattacharyya M:9106108332