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यह केवल एक गीत नहीं है, यह आत्मा की यात्रा है। ✨ “नाभादास (छप्पय)” एक गूढ़, रहस्यवादी और आध्यात्मिक संगीत रचना है, जो बाहरी आडंबरों से परे जाकर सच्ची भक्ति, सत्य और आत्मबोध की बात करती है। यह गीत उन संत विचारों से प्रेरित है जो धर्म, जाति और कर्मकांड से ऊपर उठकर मनुष्य को भीतर झाँकने की प्रेरणा देते हैं। यह संगीत हृदय को शांत करता है और चेतना को जाग्रत करता है। 🎵 यह वीडियो उनके लिए है जो: • आध्यात्मिक संगीत पसंद करते हैं • संत कबीर और रहस्यवादी काव्य से जुड़ाव महसूस करते हैं • भक्ति में गहराई और अर्थ खोजते हैं Channel Name: GulshanBlooms 🌸 Category: Entertainment | Music GulshanBlooms पर आपको मिलेगा संगीत, भक्ति और काव्य का ऐसा संगम जो मन और आत्मा दोनों को स्पर्श करता है। ✨ Headphones recommended ✨ Listen with silence and attention ✨ Share this divine experience Like करें 👍 Share करें 🔁 Subscribe करें 🔔 संगीत को खिलने दें, आत्मा को जागने दें 🌼 #नाभादास #छप्पय #आध्यात्मिक_संगीत #MysticMusic #SpiritualSong #DevotionalMusic #IndianPoetry #GulshanBlooms #class12hindi #class12th #hindichapter4 1. "भगति विमुख जे धर्म सो सब अधर्म करि गाए।" अर्थ: जो धर्म भक्ति से रहित है, वह वास्तव में धर्म नहीं बल्कि अधर्म कहलाता है। 2. "योग यज्ञ व्रत दान भजन बिनु तुच्छ दिखाए।" अर्थ: भक्ति के बिना योग, यज्ञ, व्रत, दान और साधना सभी तुच्छ और व्यर्थ हैं। 3. "हिंदू तुरक प्रमान रमैनी सबदी साखी।" अर्थ: कवि हिंदू और मुसलमान दोनों के उदाहरण देकर, रमैनी, सबद और साखी का सहारा लेते हैं। 4. "पक्षपात नहिं बचन सबहिके हितकी भाषी।" अर्थ: उनके वचनों में किसी प्रकार का पक्षपात नहीं है, वे सभी के कल्याण की बात कहते हैं। 5. "आरूढ़ दशा ह्वै जगत पै, मुख देखी नाहीं भनी।" अर्थ: उन्होंने उच्च आध्यात्मिक अवस्था प्राप्त कर ली है, इसलिए वे किसी के डर या दिखावे में बात नहीं करते। 6. "कबीर कानि राखी नहीं, वर्णाश्रम षट दर्शनी।" अर्थ: कबीर ने न तो वर्ण-आश्रम व्यवस्था की परवाह की और न ही छह दर्शनों की। 7. "उक्ति चौज अनुप्रास वर्ण अस्थिति अतिभारी।" अर्थ: उनकी वाणी में चमत्कार, अनुप्रास अलंकार और शब्दों की गहरी स्थिरता है। 8. "वचन प्रीति निर्वही अर्थ अद्भुत तुकधारी।" अर्थ: उनके वचनों में प्रेम भरा है और अर्थ अत्यंत अद्भुत तथा प्रभावशाली है। 9. "प्रतिबिंबित दिवि दृष्टि हृदय हरि लीला भासी।" अर्थ: उनकी दिव्य दृष्टि से हृदय में भगवान की लीला स्पष्ट दिखाई देती है। 10. "जन्म कर्म गुन रूप सबहि रसना परकासी।" अर्थ: ईश्वर के जन्म, कर्म, गुण और रूप उनकी वाणी में प्रकट होते हैं। 11. "विमल बुद्धि हो तासुकी, जो यह गुन श्रवननि धरै।" अर्थ: जो व्यक्ति इन गुणों को ध्यानपूर्वक सुनता है, उसकी बुद्धि निर्मल हो जाती है। 12. "सूर कवित सुनि कौन कवि, जो नहिं शिरचालन करै।" अर्थ: सूरदास की कविता सुनकर ऐसा कौन-सा कवि होगा जो श्रद्धा से सिर न झुकाए।