У нас вы можете посмотреть бесплатно साईं का नाम ही सच्चा। कबीर के दोहे। Kabir ke dhohe। Sai ka nam hi sacha। или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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कबीर दास जी के सुंदर मनमोहक गीत। मुखड़ा (कोरस): साईं का नाम ही सांचा, साईं का नाम ही साँच, झूठी माया छोड़ रे बंदे, पकड़ ले प्रेम की आँच। पोथी-पत्री छोड़ के देखो, दिल का खोलो द्वार, साईं बसते भीतर तेरे, बाहर ढूँढे संसार। अंतरा 1: बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय। अब मन का मैल उतारूँ, प्रभु के रंग में रंग जाऊँ, टूटा घड़ा हूँ साईं, तेरे नाम से भर जाऊँ। मुखड़ा: साईं का नाम ही सांचा, साईं का नाम ही साँच, झूठी माया छोड़ रे बंदे, पकड़ ले प्रेम की आँच। अंतरा 2: पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय। ज्ञान का घमंड छोड़ के, प्रेम की राह पकड़ लूँ, तेरे चरणों की धूल में, अपना सिर रख लूँ। ब्रिज (बीच का हिस्सा): काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में बदल जाती है दुनिया, मत कर तू अब शब। सांसों का क्या भरोसा है, ये आनी-जानी छाया, नाम सुमिरन कर ले बंदे, यही है सच्ची माया। अंतरा 3: साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय, मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाए। थोड़ा सा बस साथ रहे, थोड़ा सा विश्वास, तेरे नाम की दौलत साईं, सबसे बड़ी है आस। आख़िरी मुखड़ा (कोरस): साईं का नाम ही सांचा, साईं का नाम ही साँच, झूठी माया छोड़ रे बंदे, पकड़ ले प्रेम की आँच। कबीर की वाणी गाए मन, प्रेम का बजे सितार, भीतर बैठे साईं मेरे, बाहर ढूँढे संसार। #कबीर #कबीर_अमृतवाणी #भक्ति#बाबा #भक्तिsong #भक्ति