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यह कहानी लालची कुत्ते की है, जो लालच में आकर अपनी ही परछाईं को असली समझ बैठता है और जो उसके पास था, वही भी खो देता है। यह एक प्रेरणादायक नैतिक कहानी है, जो हमें सिखाती है कि अधिक लालच हमेशा नुकसान ही करता है। यह कहानी बच्चों और बड़ों—दोनों के लिए सीख से भरी हुई है। सरल भाषा, गाँव का सुंदर वातावरण और गहरी सीख इसे खास बनाते हैं। 📌 सीख: जो मिला है, उसी में खुश रहो। अधिक लालच करने से जो हमारे पास होता है, वह भी चला जाता है। You said: एक छोटे से गाँव के पास बहती हुई एक शांत और साफ़ नदी थी। नदी के किनारे हरी-भरी घास, ऊँचे-ऊँचे पेड़ और चिड़ियों की चहचहाहट माहौल को और भी सुंदर बना देती थी। उसी गाँव के आसपास एक लालची कुत्ता रहता था। वह अक्सर इधर-उधर घूमकर खाने की तलाश करता रहता था। उसे जितना मिलता, उससे उसका मन कभी नहीं भरता। एक दिन कुत्ता बहुत भूखा था। वह सुबह से ही गाँव की गलियों में भटक रहा था। कभी किसी दुकान के पास जाता, तो कभी किसी घर के पीछे। काफी देर बाद उसे एक घर के बाहर रोटी का आधा टुकड़ा पड़ा हुआ मिल गया। रोटी देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई। उसने बिना देर किए रोटी का आधा टुकड़ा अपने मुँह में दबा लिया। कुत्ता बहुत खुश था, लेकिन वह चाहता था कि कोई उससे यह रोटी न छीन ले। इसलिए वह उसे लेकर एक शांत जगह पर खाने का सोचने लगा। चलते-चलते वह उसी नदी के किनारे पहुँच गया। वहाँ ठंडी हवा चल रही थी और पानी बिल्कुल साफ़ था। कुत्ते ने सोचा कि नदी के किनारे बैठकर आराम से रोटी खा लेगा। जैसे ही कुत्ता पानी के पास गया, उसने नीचे झाँककर देखा। उसे पानी में अपनी ही परछाईं दिखाई दी। लेकिन लालची कुत्ते को यह समझ में नहीं आया कि वह उसकी अपनी ही परछाईं है। उसे लगा कि पानी में कोई दूसरा कुत्ता खड़ा है, जिसके मुँह में उससे भी ज़्यादा रोटी है। कुत्ते के मन में तुरंत लालच आ गया। उसने सोचा, “मेरे पास तो सिर्फ आधी रोटी है, लेकिन उस कुत्ते के पास पूरी रोटी लग रही है। अगर मैं उससे भी रोटी छीन लूँ, तो मेरे पास दो रोटियाँ हो जाएँगी।” वह अपनी किस्मत को बहुत बड़ा समझने लगा। उसे यह भी याद नहीं रहा कि उसके मुँह में जो रोटी है, वही उसे अभी मिली है। लालच में आकर उसने परछाईं वाले कुत्ते पर भौंकने का फैसला किया। जैसे ही कुत्ते ने ज़ोर से भौंकने के लिए मुँह खोला, उसके मुँह से रोटी का आधा टुकड़ा सीधे नदी में गिर गया। तेज़ बहाव के कारण रोटी पानी में डूब गई और बहते-बहते दूर चली गई। कुत्ता हक्का-बक्का रह गया। उसने जल्दी से पानी में देखा, लेकिन वहाँ न तो कोई दूसरा कुत्ता था और न ही कोई रोटी। तब उसे समझ आया कि जिसे वह दूसरा कुत्ता समझ रहा था, वह तो उसकी अपनी परछाईं थी। अब कुत्ता बहुत दुखी हुआ। उसने सोचा, “अगर मैं लालच न करता और जो मेरे पास था, उसी में खुश रहता, तो आज मुझे भूखा न रहना पड़ता।” वह काफी देर तक नदी के किनारे उदास बैठा रहा। पेट भूखा था और मन पछतावे से भरा हुआ। अंत में वह खाली पेट और भारी मन से वहाँ से चला गया। उस दिन के बाद कुत्ते ने एक बात अच्छी तरह सीख ली। जब भी उसे कुछ खाने को मिलता, वह उसी में संतोष करता और लालच नहीं करता। धीरे-धीरे वह समझदार बन गया और पहले से ज़्यादा खुश रहने लगा। सीख / नैतिक शिक्षा: 0 639जो मिला है, उसी में खुश रहो। अधिक लालच करने से जो हमारे पास होता है, वह भी चला जाता है। इससी लिए पूर्वजों ने कहा है की - आधा छोड़ , पूरी को धावे आधा रहे न पूरी पावे ChatGPT said: बहुत सुंदर कहानी है 👍 मैं इसे भाषा-शुद्ध, प्रवाहपूर्ण और पोस्ट/वीडियो के लिए तैयार रूप में थोड़ा निखार कर दे रहा हूँ। कहानी का भाव और संदेश वही रखा गया है, बस गलतियाँ, दोहराव और टूटे हुए हिस्से ठीक किए गए हैं। लालची कुत्ता (नैतिक कहानी) एक छोटे से गाँव के पास बहती हुई एक शांत और साफ़ नदी थी। नदी के किनारे हरी-भरी घास, ऊँचे-ऊँचे पेड़ और चिड़ियों की चहचहाहट पूरे माहौल को और भी सुंदर बना देती थी। उसी गाँव के आसपास एक लालची कुत्ता रहता था। वह इधर-उधर घूमकर हमेशा खाने की तलाश में रहता, लेकिन उसे जितना भी मिल जाता, उसका मन कभी नहीं भरता था। एक दिन कुत्ता बहुत भूखा था। वह सुबह से ही गाँव की गलियों में भटक रहा था—कभी किसी दुकान के पास, तो कभी किसी घर के पीछे। काफी देर बाद उसे एक घर के बाहर रोटी का आधा टुकड़ा पड़ा हुआ मिल गया। रोटी देखते ही उसकी आँखों में चमक आ गई। उसने बिना देर किए रोटी का आधा टुकड़ा अपने मुँह में दबा लिया। कुत्ता बहुत खुश तो था, लेकिन डर भी रहा था कि कहीं कोई उससे यह रोटी छीन न ले। इसलिए वह किसी शांत जगह पर जाकर रोटी खाने का सोचने लगा। चलते-चलते वह उसी नदी के किनारे पहुँच गया। वहाँ ठंडी हवा चल रही थी और पानी बिल्कुल साफ़ था। कुत्ते ने सोचा कि नदी के किनारे बैठकर आराम से रोटी खा लेगा। जैसे ही उसने पानी में झाँककर देखा, उसे पानी में अपनी ही परछाईं दिखाई दी। लेकिन लालची कुत्ते को यह समझ नहीं आया कि वह उसकी अपनी परछाईं है। उसे लगा कि पानी में कोई दूसरा कुत्ता खड़ा है, जिसके मुँह में उससे भी ज़्यादा रोटी है। कुत्ते के मन में तुरंत लालच आ गया। वह सोचने लगा— “मेरे पास तो सिर्फ आधी रोटी है, लेकिन उस कुत्ते के पास पूरी रोटी लग रही है। सीख / नैतिक शिक्षा जो मिला है, उसी में खुश रहो। अधिक लालच करने से जो हमारे पास होता है, वह भी चला जाता है। इसीलिए पूर्वजों ने कहा है— “आधा छोड़, पूरी को धावे, आधा रहे न पूरी पावे 🏷️ BEST TAGS / KEYWORDS लालची कुत्ता कहानी, laalchi kutta story, moral story in hindi, hindi kahani, panchatantra kahani, kids moral stories hindi, short moral story, inspirational hindi story, kahani with moral, greed story in hindi, children stories hindi, desi kahani, hindi storytelling, village story hindi