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REDOX REACTIONS | OXIDATION NUMBER CONCEPT | RAJEEV KUMAR वीडियो के अनुसार, फ्लोरीन (Fluorine) ऑक्सीजन के ऑक्सीकरण अवस्था को निम्नलिखित तरीके से प्रभावित करता है: इलेक्ट्रॉन की हानि (Loss of Electrons): वक्ता बताते हैं कि फ्लोरीन एकमात्र ऐसा तत्व है जिसकी इलेक्ट्रोनेगेटिविटी (Electronegativity) ऑक्सीजन से अधिक होती है। इस कारण, जब ऑक्सीजन फ्लोरीन के साथ जुड़ता है, तो ऑक्सीजन को इलेक्ट्रॉन खोने पड़ते हैं (16:00 - 16:21)। धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या (Positive Oxidation Number): चूंकि फ्लोरीन हमेशा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, इसलिए इसके साथ यौगिक बनाने पर ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या धनात्मक (Positive) हो जाती है। यह ऑक्सीजन के सामान्य व्यवहार (-2) के विपरीत है (16:21 - 21:31)। विशिष्ट उदाहरण: OF2 (Oxygen Difluoride): इसमें ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण नंबर +2 होता है क्योंकि वह दो फ्लोरीन परमाणुओं को इलेक्ट्रॉन देता है (20:07 - 21:31)। O2F2 (Oxygen Perfluoride): इस यौगिक में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण नंबर +1 होता है (16:39 - 16:42, 22:15 - 23:47)। वीडियो में यह स्पष्ट किया गया है कि फ्लोरीन की उच्च इलेक्ट्रोनेगेटिविटी के कारण ही ऑक्सीजन धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है (20:12 - 21:31)।