У нас вы можете посмотреть бесплатно श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 (श्लोक 1–35) | शोक से शौर्य तक: आत्मज्ञान, कर्मयोग और निर्भय जीवन का उपदेश или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 2 के श्लोक 1 से 40 तक भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को शोक, भय और भ्रम से बाहर निकालकर आत्मज्ञान, कर्तव्य और कर्मयोग का मार्ग दिखाते हैं। 🔹 शोक अज्ञान से उत्पन्न होता है 🔹 आत्मा अविनाशी है, शरीर नश्वर 🔹 कर्तव्य से पलायन अपमान और भय देता है 🔹 समत्व भाव ही सच्चा योग है 🔹 कर्म करो, फल की आसक्ति छोड़ो 🔹 धर्म का छोटा प्रयास भी जीवन की रक्षा करता है यह अध्याय केवल युद्धभूमि के लिए नहीं, बल्कि आज के जीवन—तनाव, असमंजस, असफलता और निर्णयों के लिए भी है। 📿 गीता सिखाती है — डर छोड़ो, धर्म पकड़ो। फल छोड़ो, कर्म अपनाओ। 👉 गीता ज्ञान के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें 🙏 जय श्री कृष्ण