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"गिग इकोनॉमी का झूठा सपना – Swiggy, Zomato वाले दर्द | सरकार और सिस्टम का सच | ज़िंदगी के सच Ep.2 | हिंदी स्पोकेन वर्ड पोएट्री 2026" “नमस्ते दोस्तों। स्वागत है ‘ज़िंदगी के सच’ के दूसरे एपिसोड में , वो सीरीज़ जो भारत की असली ज़िंदगी को कविता की ज़ुबान से बयां करती है। आज जनवरी 2026 है। गिग इकोनॉमी की रियलिटी ये है: • NITI Aayog की 2022 रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 में गिग वर्कर्स 77 लाख थे, जो 2029-30 तक 2.35 करोड़ हो जाएंगे – यानी हर साल लाखों की ग्रोथ।  2025 तक ये संख्या 1.5 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है, खासकर डिलीवरी, राइड-शेयरिंग जैसे सेक्टर्स में। • PLFS और CMIE डेटा से पता चलता है कि प्लेटफॉर्म-बेस्ड गिग वर्कर्स में गिरावट आई है – 2018-19 में 28.3 लाख से 2019-20 में 23.5 लाख, लेकिन महामारी के बाद ग्रोथ तेज़ हुई।  • Swiggy, Zomato जैसे डिलीवरी वर्कर्स का दर्द: दिसंबर 2025 में 40,000+ वर्कर्स ने क्रिसमस और न्यू ईयर ईव पर फ्लैश स्ट्राइक की – कम पे, असुरक्षा, 10-मिनट डिलीवरी के रिस्क की वजह से।  एक सर्वे के मुताबिक, 64% वर्कर्स रोज़ 200-600 रुपये कमाते हैं, 15-16 घंटे काम करते हैं।  सरकार स्कीम्स चला रही है – e-Shram पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, जहां गिग वर्कर्स को Ayushman Bharat, PMJJBY जैसी सोशल सिक्योरिटी मिल सकती है।  दिसंबर 2025 के ड्राफ्ट रूल्स में 90 दिन (या 120 दिन मल्टीपल एग्रीगेटर्स के लिए) काम की शर्त रखी गई है।  लेकिन सवाल ये है: क्या ये स्कीम्स ग्राउंड पर पहुंच रही हैं? रजिस्ट्रेशन कम, इम्प्लीमेंटेशन कमजोर – वर्कर्स को बीमा, पेंशन, सेफ्टी नहीं मिल रही। आज की कविता इसी सपने के झूठ और हकीकत पर है: ‘गिग इकोनॉमी का झूठा सपना’। सुनिए, महसूस कीजिए, और एंड में अपनी स्टोरी कमेंट में ज़रूर शेयर करना। चलिए शुरू करते हैं।” फोन पर ऐप डाउनलोड, बाइक स्टार्ट, “फ्रीडम है, अपना बॉस खुद” – ये था वादा। Swiggy, Zomato, Blinkit – नाम बड़े, सपने बड़े, “कितना भी काम करो, कमाओ जितना चाहो”। शुरू में लगा – अच्छा है, जॉब नहीं मिला तो ये सही, रोज़ 500-600 कमाओ, घर चलाओ, सपने पालो। लेकिन हकीकत? 15-16 घंटे सड़क पर, बारिश में, धूप में। ऑर्डर पिक, ड्रॉप, रेटिंग गिरे तो पे कट। पे? 200-600 रुपये रोज़ – 64% वर्कर्स इसी में जी रहे। 10-मिनट डिलीवरी – लाइफ रिस्क, ऐक्सिडेंट रोज़, ट्रैफिक में भागो, स्पीड लिमिट तोड़ो, जान जोखिम में डालो। ऐप अल्गोरिदम – रैंडम, अनफेयर, इंसेंटिव कटते जाते। NITI Aayog कहता है 77 लाख गिग वर्कर्स 2021 में, अब करोड़ों में, लेकिन सोशल सिक्योरिटी? बीमा? पेंशन? कुछ नहीं। सरकार e-Shram लाई – रजिस्टर करो, Ayushman Bharat, PM-SYM पेंशन स्कीम, लेकिन कितने पहुंचे? ड्राफ्ट रूल्स में 90 दिन काम की शर्त – मानो आसान हो। पर ग्राउंड पर? रजिस्ट्रेशन मुश्किल, स्कीम्स पेपर पर, वर्कर्स स्ट्राइक करते – दिसंबर 2025 में 40,000 ने आवाज़ उठाई। फैमिली पूछती – “कब तक ऐसे?” मैं बोलता – “बस थोड़ा और……” पर बॉडी टूट रही। ऐक्सिडेंट हो जाए, हॉस्पिटल बिल कौन दे? कंपनी कहे – “तुम इंडिपेंडेंट पार्टनर हो, हमारी जिम्मेदारी नहीं।” स्ट्राइक पर निकले – क्रिसमस, न्यू ईयर ईव, वादे हुए – बेहतर पे, सेफ्टी, लेकिन कुछ नहीं बदला। Zomato, Swiggy कहते – “ऑर्डर्स रेकॉर्ड, स्ट्राइक से कोई फर्क नहीं,” पर हमारी ज़िंदगी? झूठा सपना, बस भाग-दौड़। सरकार सुन रही? तेलंगाना बिल लाया – सोशल सिक्योरिटी फंड, लेकिन नेशनल लेवल पर? कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020, लेकिन इम्प्लीमेंटेशन ज़ीरो। ये दर्द सिर्फ मेरा नहीं। ये उस डिलीवरी बॉय का है जो बारिश में भीड़ में फंसकर रेटिंग गंवाता है। ये उस गिग वर्कर का है जो 15 घंटे काम कर घर पहुंचता है, थककर सो जाता है। ये हम सबका है – जो फ्रीडम के नाम पर एक्सप्लॉइट हो रहे। सिस्टम फेल कर रहा – कंपनियां प्रॉफिट बनाती, सरकार स्कीम्स बनाती, पर वर्कर्स को राइट्स? सेफ्टी? फेयर पे? नहीं। हां, e-Shram जैसी कोशिशें हैं, लेकिन हमें और बेहतर चाहिए मिनिमम वेज, हेल्थ इंश्योरेंस, यूनियन राइट्स। लेकिन सुनो… हम रुकने वाले नहीं! ये गिग जॉब बोझ नहीं, मौका है – अगर फेयर हो। स्ट्राइक से आवाज़ उठाओ, यूनियन बनाओ, राइट्स मांगो। सरकार को जगाओ – स्कीम्स इम्प्लीमेंट करो, 90 दिन नहीं, हर वर्कर को कवर करो। हम करोड़ों हैं – भारत की गिग फोर्स। अगर सिस्टम नहीं बदलेगा, तो हम बदल देंगे। फेयर पे, सेफ्टी, सोशल सिक्योरिटी – ये हमारा हक। छोटी स्ट्राइक भी बड़ा बदलाव ला सकती है। तो उठो, ऐप ऑन करो लेकिन राइट्स के लिए लड़ो। क्योंकि गिग इकोनॉमी का झूठा सपना… एक दिन… सच का रास्ता बनेगा। “हम रुकने वाले नहीं… हम बदलाव लाने वाले हैं।”) “दोस्तों, ये कविता सिर्फ शब्द नहीं – हमारी कलेक्टिव आवाज़ है। सरकार e-Shram, सोशल सिक्योरिटी स्कीम्स चला रही है, लेकिन इम्प्लीमेंटेशन में कमी है – हम मिलकर बदलाव ला सकते हैं। अगर ये वीडियो आपको अच्छा लगा हो, तो लाइक करो, शेयर करो उन दोस्तों के साथ जो गिग जॉब्स में हैं। सब्सक्राइब कर लो, और बेल ऑइकन को दबाना ना भूलें– हर हफ्ते नया एपिसोड। अब तुम्हारी बारी: कमेंट में लिखो – • तुम्हारा गिग स्ट्रगल क्या है? Swiggy, Zomato में क्या दिक्कतें? • स्ट्राइक या प्रोटेस्ट का एक्सपीरियंस? • सरकार की स्कीम्स (e-Shram) का तुम्हारा व्यू क्या? • या कोई उम्मीद की बात जो शेयर करना चाहो। हम सब मिलके बात करेंगे, सपोर्ट देंगे। क्योंकि अकेले नहीं लड़ रहे हम। अगला एपिसोड: ‘2026 में सपने क्यों टूट रहे हैं?’ – यूथ अनसर्टेंटी। तब तक… खुद पर भरोसा रखो। तुम महत्वपूर्ण हो। नमस्ते। जय हिंद।” #gigeconomy #gigeconomyindia #delivaryworkersstrike #eshrambenefits #eShram #reallifepoetry #hindipoetry #swiggy #zomato