У нас вы можете посмотреть бесплатно हे नारायण हे जगदीश्वर | भगवान विष्णु जी का बहुत ही सुंदर भजन | Vishnu Bhajan 2026 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
जय श्री हरि! 🙏 स्वागत है आप सभी का हमारे चैनल "Divya Bhakti Sur Sangam" पर। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं जगत के पालनहार, भगवान श्री हरि विष्णु जी की स्तुति में एक अत्यंत मधुर और शांतिदायक भजन "हे नारायण, हे जगदीश्वर"। यह भजन भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप और उनकी महिमा का वर्णन करता है। इस भजन को सुनने मात्र से मन को असीम शांति प्राप्त होती है और घर में सकारात्मकता का संचार होता है। भजन के बोल (Lyrics): हे नारायण, हे जगदीश्वर, चरणों में तेरे धाम है, चार भुजाधारी, चक्र सुदर्शन, पावन तेरा नाम है... (यहाँ भजन की कुछ पंक्तियाँ लिख सकते हैं) Credits: Singer & Composition: [अपना नाम लिखें] Lyrics: [Divya Bhakti Sur Sangam] Art & Graphics: Sumit Pal Arts Connect with us: अगर आपको हमारा यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया वीडियो को Like करें, Comment में "जय श्री हरि" लिखें और हमारे चैनल को Subscribe करना न भूलें ताकि आप तक हमारी हर नई प्रस्तुति सबसे पहले पहुँचे। #VishnuBhajan #NarayanaSong #BhaktiSangeet #DivyaBhaktiSurSangam #SumitPalArts #LordVishnu #DevotionalSongs2026 #PeacefulBhajan #ShriHari : हे नारायण हे जगदीश्वर | भगवान विष्णु जी का बहुत ही सुंदर भजन | Vishnu Bhajan 2026 Emotional/Devotional: मन को शांति देने वाला श्री हरि विष्णु भजन - हे नारायण हे जगदीश्वर Short & Catchy: विष्णु जी की महिमा - हे नारायण हे जगदीश्वर | New Bhakti Song 2026 भजन: हे नारायण, हे जगदीश्वर (स्थायी) हे नारायण, हे जगदीश्वर, चरणों में तेरे धाम है, चार भुजाधारी, चक्र सुदर्शन, पावन तेरा नाम है। हे नारायण, हे जगदीश्वर... (अंतरा - 1) क्षीर सागर में वास तुम्हारा, शेषनाग की शय्या है, भक्तों के तुम पालनहारी, धन्य तुम्हारी माया है। पीताम्बर धारी, मनोहारी, तुम ही सुख के दाता हो, दीन-दुखियों के संकट हरते, तुम ही भाग्य विधाता हो। हे जनार्दन, हे मधुसूदन, तुझको कोटि प्रणाम है। हे नारायण, हे जगदीश्वर... (अंतरा - 2) शंख चक्र और गदा पद्म, हाथों में शोभा पाते हैं, कौस्तुभ मणि की आभा देख, देव सभी हर्षते हैं। गरुड़ वाहन पर होकर सवार, जब धरती पर आते हो, अधर्म का तुम नाश करके, धर्म की ज्योत जगाते हो। हे अविनाशी, हे सुखरासी, तुझमें ही विश्राम है। हे नारायण, हे जगदीश्वर... (अंतरा - 3) राम रूप में मर्यादा दी, कृष्ण रूप में प्रेम सिखाया, दशावतार धर युग-युग में, सत्य का मार्ग दिखाया। तेरी भक्ति की अविरल धारा, मेरे मन में बहती रहे, 'सुमित' की हर एक साँस प्रभु, बस तेरा नाम ही कहती रहे। हे रमापति, हे कमलापति, तू ही रक्षक, तू ही राम है। हे नारायण, हे जगदीश्वर...