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Poetry - BABA BULLEH SHAH Composed & sung by VARSHA SINGH DHANOA Music director & Producer GURU DHANOA रांझा जोगीड़ा, बन आया नी, वाह सांगी सांग रचाया नी| टेक| इस जोगी दे नैन कटोरे, बाज़ा वांगूं लैंदे डोरे, मुख वेखिआं दुःख जावण छोड़े, इन्हां अक्खियां लाल लखाया नी HINDI MEANING निराकार और प्रकाशमय आत्मा माया के प्रभाव से देह धारण करती है| परमात्मा (रांझा) को भी संसार में योगी का वेश धरकर आना होता है सद्दगुरु हीर को प्रभु रूप की असली झलक दिखाता है| हीर (आत्मा) को जेब रांझे में प्रभु के दर्शन होते हैं, तो वह स्वत: उस योगी की तरफ़ खिंची चली जाती है और प्रीति-पुरातन जाग जाती है| बुल्लेशाह ने इसी भाव को इस काफ़ी में व्यक्त करते हुए लिखा है कि रांझा (परमात्मा) जोगी बनकर आया है और कैसा अनुपम रूप है और उस स्वांगधारी ने कैसा स्वांग रचाया है बुल्ल्हा शौह दी हुण गत पाई, पीत पुरानी मुड़ मचाई, एह गल कीकण छपे छुपाई, लै तख़त हज़ारे नूं धाया नी| HINDI MEANING बुल्लेशाह कहता है, अब मैं पति परमेश्वर को जान गई हूं और पुरानी प्रेमाग्नि पुन: धधक उठी है| यह प्रेम अब कैसे भी छुपाए नहीं चुप सकता| मेरा प्रिय मुझे तख़्त हज़ारे की ओर लेकर चल पड़ा है| #varshasinghdhanoa #gurudhanoa #bullehshah