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⁰ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं का एक प्रमुख चार धाम तीर्थ स्थल है, जो भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ (कृष्ण), उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। 12वीं सदी में राजा अनंतवर्मन चोडगंगा देव द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी भव्य रथ यात्रा और रहस्यमयी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। जगन्नाथ मंदिर पुरी: मुख्य बातें स्थान व महत्व: यह मंदिर पुरी, ओडिशा के तट पर स्थित है और इसे वैष्णव संप्रदाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है। देवता: यहाँ मुख्य रूप से तीन देव हैं: भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा। ये काष्ठ (लकड़ी) की मूर्तियों के रूप में पूजे जाते हैं। रथ यात्रा: प्रतिवर्ष आषाढ़ माह (जून-जुलाई) में होने वाली भव्य रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें रथों को गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है। वास्तुकला: यह मंदिर कलिंग वास्तुकला शैली का उत्कृष्ट नमूना है, जिसकी ऊँचाई लगभग 200 फीट से अधिक है। रहस्यमयी तथ्य: विपरीत झंडा: मंदिर के शीर्ष पर स्थित झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। वैज्ञानिकों के लिए अनसुलझा: मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी या हवाई जहाज नहीं उड़ता। प्रसाद: मंदिर की रसोई में 7 मिट्टी के बर्तनों में प्रसाद बनता है, जहाँ सबसे ऊपर वाले बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है। प्रवेश: यहाँ केवल हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति है। कैसे पहुँचें: सबसे निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर (60 किमी) और रेलवे स्टेशन पुरी है। विकिपीडिया +6 यह मंदिर अपनी धार्मिक आस्था और चमत्कारी संरचनाओं के लिए हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।