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जब अपनों का जाना स्वीकार न हो: दोष देना सही या गलत? अपनों की मृत्यु: क्या 'इंसाफ' और 'सजा' मांगने से उन्हें शांति मिलती है? 🛑 किसे दोष दें? मौत के बाद सजा, बदला और इंसाफ का कड़वा सच! | Karmic Account Death ke baad 'Insaaf' mangna: Sahi ya Galat? | The Illusion of Nimitt Apno ki Death par Blame game aur Revenge ka Spiritual Truth 👁️ Stop Blaming! जाने वाले को आपकी 'दुआ' चाहिए या 'इंसाफ'? The Illusion of Justice: Why Blaming Others Won't Bring Them Peace. Sudden Death & The Blame Game: The Hidden Spiritual Science. 1. ईश्वरीय न्याय का 'ऑटो-मोड' तंत्र (The Auto-Mode of Cosmic Justice) प्रकृति और परमात्मा का न्याय तंत्र पूरी तरह से स्वचालित (Automated) है। इसमें न कोई रिश्वत चलती है, न कोई गवाही चाहिए, और न ही किसी वकील की आवश्यकता है। जैसे आग को छूने पर हाथ जलना निश्चित है—इसके लिए किसी अदालत या जज की आवश्यकता नहीं होती—ठीक वैसे ही, जो आत्मा किसी को पीड़ा देती है (चाहे वह लापरवाही से हो या जानबूझकर), उसका 'पाप का खाता' (Negative Karmic Account) उसी सेकंड शुरू हो जाता है। वह कर्म अपना फल (दंड) समय आने पर बिल्कुल सटीक रूप से देगा। प्रकृति किसी को नहीं छोड़ती। इसलिए, हमें अपने हाथ में सजा देने का अधिकार लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। 2. नया 'पेनफुल कार्मिक अकाउंट' (The Trap of New Karmic Bondage) जब हम किसी व्यक्ति के प्रति क्रोध, नफरत या 'इंसाफ/बदले' की भावना रखते हैं, तो हम अनजाने में उस अपराधी आत्मा के साथ अपना एक नया हिसाब-किताब (Account) जोड़ लेते हैं। आध्यात्मिक नियम कहता है कि "आप जिसके बारे में सबसे ज्यादा सोचते हैं, आप उसी के साथ बंध जाते हैं।" * यदि हम उस निमित्त बनी आत्मा के प्रति नफरत का चिंतन करते हैं, तो हम अपनी शुद्ध ऊर्जा को नष्ट करते हैं और भविष्य (या अगले जन्म) के लिए उसी आत्मा के साथ एक नया दर्दनाक लेन-देन तैयार कर लेते हैं। हमारा उद्देश्य इस जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होना है, न कि नए दुश्मन बनाकर उलझना। 3. दिवंगत आत्मा पर इस 'नए अकाउंट' का भारी प्रभाव जब परिवार वाले 'इंसाफ' की लड़ाई में उलझते हैं और दिन-रात उस अपराधी को कोसते हैं, तो वे जो भारी और नकारात्मक वाइब्रेशन्स (Negative Vibrations) उत्पन्न करते हैं, वे उस जाने वाली आत्मा तक भी पहुँचते हैं। इससे वह आत्मा अपनी आगे की यात्रा में शांति का अनुभव नहीं कर पाती। वह महसूस करती है कि "मेरे कारण मेरे पीछे वाले लोग अभी भी क्रोध और पीड़ा में जल रहे हैं।" यह उस आत्मा को भी मोह और दुःख के बंधनों में जकड़ लेता है। 4. परम मुक्ति और साक्षी भाव (Detached Observer) जब आप यह स्वीकार कर लेते हैं कि "कर्म का विधान अपने आप काम करेगा," तो आप तुरंत 'साक्षी दृष्टा' (Detached Observer) बन जाते हैं। आप अपना पूरा ध्यान और ऊर्जा उस गई हुई आत्मा को श्रेष्ठ दुआएं देने और किसी जरूरतमंद (जैसे अनाथ बच्चे) का जीवन संवारने में लगा देते हैं। इससे तीन महान कार्य एक साथ होते हैं: जाने वाली आत्मा को परम शांति और पुण्य मिलता है। आपका अपना मन दुःख और बदले की आग से मुक्त हो जाता है। आप किसी नए 'नेगेटिव कार्मिक अकाउंट' में फंसने से बच जाते हैं। यह समझ आना कि "मेरा काम दंड देना नहीं, दुआ देना है," वास्तव में आत्मा की बहुत बड़ी जीत है। किसी अपने को अचानक खो देने का दुःख शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। जब ऐसी अप्रत्याशित घटना होती है, तो हमारा मन विद्रोह कर उठता है। हम अक्सर परिस्थितियों, डॉक्टरों या किसी अन्य व्यक्ति को दोष देने लगते हैं और सोचते हैं कि उन्हें 'सजा' दिलाने या 'इंसाफ' मांगने से जाने वाले की आत्मा को शांति मिलेगी। लेकिन क्या आध्यात्मिक सत्य वास्तव में यही है? Bk santosh - mystery revealed के इस वीडियो में, हम जीवन और मृत्यु के सबसे गहरे और अनदेखे रहस्यों से पर्दा उठाएंगे। हम समझेंगे कि 'कर्मों का अचूक विधान' (Law of Karma) और 'निमित्त' (Instrument) का विज्ञान क्या है। हम यह भी जानेंगे कि कैसे हमारा क्रोध, बदले की भावना और गहरा शोक उस जाने वाली आत्मा को शांति देने के बजाय उसके नए सफर में भारीपन और रुकावट पैदा करते हैं। यदि आप या आपका कोई अपना इस असहनीय दुःख और उलझन से गुजर रहा है, तो यह वीडियो आपको सत्य ज्ञान के माध्यम से उस दर्द से बाहर निकलने और दर्द को दुआओं में बदलने का रास्ता दिखाएगा। 🌟 इस वीडियो के मुख्य बिंदु (Chapters): 0:00 - अचानक विदाई का दर्द और हमारा 'इंसाफ' मांगने का भ्रम 2:15 - क्या सजा दिलाने से जाने वाले को सच में शांति मिलती है? 5:30 - 'निमित्त' (Instrument) का विज्ञान और कर्मों का अटल विधान 8:45 - हमारे शोक और क्रोध का आत्मा पर सूक्ष्म प्रभाव (Science of Vibrations) 12:20 - मृत्यु के बाद सबसे श्रेष्ठ कर्म और सच्ची श्रद्धांजलि (महादान) 16:10 - मोह को छोड़कर शक्तिशाली 'साक्षी दृष्टा' (Detached Observer) कैसे बनें? ✨ याद रखें: सच्ची श्रद्धांजलि हमारे आंसुओं या किसी से बदला लेने में नहीं, बल्कि हमारे शुद्ध संकल्पों और निस्वार्थ सेवा में है। आइए, जाने वाली आत्मा को दुःख की बेड़ियों में बांधने के बजाय, उन्हें शांति और मुक्ति की दुआओं के साथ विदा करें। अगर इस आध्यात्मिक सत्य से आपके मन को शांति मिली हो, तो वीडियो को लाइक करें, इसे उन लोगों के साथ शेयर करें जिन्हें इस हीलिंग (Healing) की सबसे ज्यादा जरूरत है, और ऐसे ही गहरे रहस्यों को समझने के लिए चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। #SpiritualHealing #LifeAndDeath #Karma #OvercomingGrief #SoulJourney #MysteryRevealed #InnerPeace #DeathAndKarma