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बुलावा: मौत का | Call: Of Death | Horror Stories | Bhootiya cartoon TV| ..... -------------------------------------------------------- Welcome to the "Bhootiya Cartoon TV " YouTube channel. ------------------------------------------------------------------------------------ ⚠️ Channel Disclaimer This channel strictly does not promote, depict, or support any form of harmful, dangerous, or sexualized content involving minors. All stories, characters, and visuals shown in our videos are purely fictional and created for entertainment purposes only. We do not encourage or condone any actions or behavior that could be considered dangerous, inappropriate, or offensive in real life. ------------------------------------------------------------------------------------ Note: We don't sell any graphics or characters, please don't buy our characters from anywhere. ------------------------------------------------------------------------------------ Thanks for your love and support. Welcome to the "Bhootiya Cartoon TV " YouTube channel. Let's dive into a world of horror with us, our channel "Bhootiya Cartoon TV " brings you spine-chilling horror & witch stories, Subscribe Now! ------------------------------------------------------------------------------------ Please Subscribe to Our Channel: BhootiyaCartoonTV ------------------------------------------------------------------ #Bulavamaotka #HindiStories #Spinechillingstories #ChudailKiKahaniya #StoriesinHindi #HauntedStories #HindiKahaniya #Stories #LatestHindiStories #Kahaniya #Kahani #HindiKahaniya #Stories #Horror #CreepyStories #HauntedStories #Bhootiya #BhootKiKahaniya #DreamStoriesTV #HorrorStories #Story #ChudailKiKahaniya #DarawaniKahaniya #BhootiyaCartoonTV @BhootiyaCartoonTV. शीर्षक: बुलावा - मौत का कहानी की शुरुआत किसी शादी की खुशियों से नहीं, बल्कि एक भयानक मंज़र से होगी। रामपुर... कहने को तो यह एक साधारण सा गाँव था, लेकिन यहाँ की रातों में एक ऐसी दहशत छिपी थी जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। इस गाँव का एक खौफनाक नियम था—सूरज ढलते ही अपने घरों की चौखट के अंदर कैद हो जाओ। क्योंकि रात के अंधेरे में यहाँ घूमता था 'छलावा'। एक ऐसा भूत जो आपकी मौत को... आपकी अपनी आवाज़ बनाकर बुलाता था। दहशत का यह सिलसिला शुरू हुआ एक काली रात से। रात का एक बजा था। रामू काका अपने घर के अंदर लालटेन जलाकर बैठे थे। अचानक... दरवाज़े पर दस्तक हुई। खट... खट... खट! रामू काका चौंक गए और बोले, "इस पहर कौन आ गया?" तभी बाहर से एक जानी-पहचानी आवाज़ आई, "बापू, जल्दी दरवाज़ा खोलो! शहर से आते वक्त मेरी गाड़ी खराब हो गई, मैं बहुत थक गया हूँ बापू।" रामू काका खुश हो गए और बोले, "अरे बिटवा! तू आ गया? रुक, अभी खोलता हूँ।" रामू काका भूल गए कि उनका बेटा अगले हफ्ते आने वाला था। जैसे ही उन्होंने भारी लकड़ी का दरवाज़ा खोला, बाहर कोई नहीं था... सिर्फ एक गहरी, काली धुंध थी। रामू काका की आँखें फटी की फटी रह गईं। एक लंबा सा साया धुंध से निकला और पलक झपकते ही उन्हें खींचकर अंधेरे में ले गया। सुबह सिर्फ उनकी एक टूटी हुई लालटेन मिली। दहशत का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। ठीक दो दिन बाद, गाँव के दूसरे छोर पर रहने वाले किशन के घर पर दस्तक हुई। इस बार आवाज़ और भी मासूम थी। किशन और उसकी पत्नी सो रहे थे, तभी दरवाज़े के पास से उनकी पाँच साल की बेटी की आवाज़ आई, जो असल में अंदर ही सो रही थी। बाहर से आवाज़ आई, "माँ... ओ माँ! देखो मैं बाहर झूले के पास गिर गई हूँ, मुझे बहुत दर्द हो रहा है माँ!" किशन की पत्नी घबराकर उठी और बोली, "अरे! मुन्नी बाहर कैसे चली गई?" किशन ने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और कहा, "पागल मत बनो! मुन्नी देखो यहाँ सो रही है। दरवाज़ा मत खोलना, वो वही छलावा है!" किशन ने अपनी पत्नी को तो रोक लिया, लेकिन वह आवाज़ इतनी दर्दनाक थी कि पूरी रात वे दोनों सो नहीं पाए। अगले दिन उन्होंने देखा कि उनके दरवाज़े पर किसी के लंबे नाखूनों के निशान थे, जैसे कोई अंदर घुसने की ज़ोर-ज़ोर से कोशिश कर रहा हो। इसी दहशत के बीच, शहर की पली-बढ़ी मीरा अपनी शादी के बाद पहली बार अपने ससुराल रामपुर आई थी। वह इन सब कहानियों से बेखबर थी। गाँव पहुँचते ही उसने हैरानी से पूछा, "रमेश, देखो न! ये गाँव कितना सुंदर है, लेकिन यहाँ सन्नाटा क्यों है? दोपहर के वक्त भी लोग अपने घरों में दुबके हुए हैं?" रमेश ने उदास स्वर में जवाब दिया, "मीरा, यहाँ की सुंदरता पर मत जाओ। यहाँ रातें बहुत लंबी और भारी होती हैं। बस याद रखना, रात को कुछ भी सुनाई दे, बाहर मत देखना।" मीरा हँसकर बोली, "क्या रमेश! तुम भी माँ जी की तरह पुरानी बातों में यकीन करने लगे? शहर में हम रात को फिल्म देखने जाते हैं, और यहाँ तुम कह रहे हो कि बाहर भी न देखूँ?" शाम के वक्त मीरा की सास, सुमित्रा देवी, खिड़कियाँ बंद करते हुए बोलीं, "बहू, सूरज डूबने वाला है। जल्दी से सारे खिड़की-दरवाज़े बंद कर ले। और सुन, आज रसोई का काम जल्दी निपटा लेना।" मीरा ने कहा, "माँ जी, मुझे मंदिर जाना था। मैंने सुना है गाँव का पुराना मंदिर बहुत सिद्ध है।" सुमित्रा देवी घबराकर चिल्लाईं, "पागल हो गई है क्या? मंदिर का रास्ता उस पुराने पीपल से होकर जाता है। वो मौत का अड्डा है! वहाँ 'वो' रहता है। एक बार जिसका नाम उसने पुकार लिया, वो फिर इस दुनिया का नहीं रहता।" मीरा ने फिर टोकते हुए कहा, "पर माँ जी, भगवान के घर जाने में कैसा डर?"............................................