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🌾 शीर्षक: "उनकी मुस्कान के पीछे" प्रस्तावना गांव की मिट्टी में कुछ रिश्ते अनकहे रह जाते हैं। कुछ बातें कभी ज़ुबान तक नहीं आ पातीं, पर दिल में उम्रभर की जगह बना लेती हैं। यह एक ऐसे ही प्रेम का चित्रण है — जिसमें चाहत थी, पर मंज़िल नहीं। --- कहानी मैं 19 साल का था। गांव का लड़का, सीधा-सादा, पढ़ाई में मग्न। लेकिन मेरे दिल के किसी कोने में एक साया बस गया था — एक 52 वर्षीय जमींदार अंकल का साया, जो मेरे पिता के अच्छे मित्र थे। वे अक्सर हमारे घर आया करते, बातें करते, हँसते — उनकी मुस्कराहट में कुछ था... कुछ ऐसा जो सीधे मेरे दिल को छू जाता। उनकी गहरी सांवली आंखें, चौड़ा सीना, नम्र वाणी और आत्मविश्वासी चाल — सब कुछ मुझे सम्मोहित कर देता था। एक दिन उन्होंने मुझसे कहा: "पढ़े-लिखे लड़कों से बात करके अच्छा लगता है।" ये सुनकर मेरे मन में एक उम्मीद की लौ जली — क्या वो भी मुझे उसी नज़रों से देखते हैं जैसे मैं उन्हें देखता हूं? पर हर बार जब मन करता कुछ कहने का, डर, शर्म, और समाज की बंदिशें मेरी जुबां रोक देतीं। गर्मी के दिन होते थे — वो अक्सर केवल अंडरवियर में घर के बाहर टहलते। उनका शरीर, कांखों के बाल, आधी सफेद मूंछों के नीचे लाल से होंठ — मेरे लिए किसी कल्पना से कम न थे। हर रात उनका ख्याल आते ही मैं खुद को उनकी बाहों में महसूस करता, और उसी एहसास के साथ सो जाता। ये सिलसिला तीन साल तक चलता रहा — केवल आंखों की भाषा, बिना कहे इशारे, और मेरे मन का तूफ़ान। --- फैसला फिर एक दिन, मैंने ठान लिया — अब और नहीं। अब मैं पूछकर ही रहूंगा। सही मौका मिला — पापा शहर गए हुए थे और वो अकेले घर आए। वो मेरे कमरे में बैठे, हल्की-फुल्की बातें करते रहे। जब वो जाने लगे, मैंने उन्हें रोका। "अंकल, मुझे आपसे एक ज़रूरी बात करनी है।" वो मुस्कराए, बोले — "बोलो बेटा।" मैंने उन्हें एक गे स्टोरी सुनाई और पूछा — "आप मुझे बार-बार इस तरह देखते हैं… क्या आपको मुझ जैसे लड़के पसंद हैं?" वो हँसे। बोले, "अरे नहीं बेटा, मैं तो बस मजाक करता हूं।" उनका जवाब सुनकर मेरे दिल का एक टुकड़ा चुपचाप टूट गया। फिर भी, हिम्मत करके पूछा — "क्या मैं आपको गले लगा सकता हूं एक बार?" उन्होंने सहमति दी। मैं उनसे दो बार गले मिला — एक सपना था जो सच हो रहा था। फिर मैंने उनकी आंखों में देखा और कहा — "एक किस दे दीजिए?" उन्होंने गाल आगे कर दिया। शायद फ्रेंच किस के बारे में नहीं जानते थे। मैंने उन्हें बताया, और तब उन्होंने अपने होंठ आगे किए। मैंने वो चुंबन किया — चार साल की चाहत, एक क्षण में साकार। मेरे भीतर हलचल मच गई। मैं खुद को संभाल नहीं पाया और वापस अपनी किताबों में खो गया। वो कुछ देर मुझे निहारते रहे, फिर चले गए। --- कुछ दिन बाद… मैं बहुत उत्साहित था — उन्हें अपना नंबर भी दिया था। पर... ना कोई कॉल, ना कोई संदेश। जब रास्ते में मिले, तो ऐसे इग्नोर किया जैसे मैं कभी था ही नहीं। और उस दिन के बाद, हम कभी नहीं मिले। --- समापन वो सिर्फ तीन साल की नज़रों की कहानी थी और एक दिन की हिम्मत से टूट गई। मुझे आगे बढ़ने में सालों लग गए। पर आज भी… कभी-कभी… जब गांव की गर्म हवाएं चलती हैं, जब अकेलापन आकर चुपके से लिपटता है, तो उनकी मुस्कान याद आती है। --- 💭 सीख: प्यार हमेशा पूरा नहीं होता, पर वो आपको गढ़ता है — मजबूत, गहरा और इंसानी। --- #lgbtqindia #respectlove #indiansociety #love #artificialintelligence #homosexuel #gayman #gayperson #finland