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भगवदगीता अध्याय 2 – सांख्य योग कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में जहाँ अर्जुन शोक, भय और भ्रम से घिरा हुआ था, वहीं से जीवन के सबसे गहरे ज्ञान का उदय होता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण पहली बार अर्जुन को उपदेश देते हैं और गीता का वास्तविक दर्शन प्रारंभ होता है। सांख्य योग हमें सिखाता है कि हम शरीर नहीं, आत्मा हैं। आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है, नष्ट केवल शरीर होता है। इस अध्याय में आप जानेंगे: – आत्मा का शाश्वत सत्य – शोक और भय का वास्तविक कारण – कर्म और कर्तव्य का सही अर्थ – फल की आसक्ति क्यों बंधन बनती है – स्थितप्रज्ञ पुरुष कौन होता है – सच्ची शांति कैसे प्राप्त होती है यह अध्याय केवल युद्ध की कथा नहीं है, यह हर उस मनुष्य के लिए है जो जीवन में भ्रम, डर, तनाव और निर्णयों से जूझ रहा है। 🙏 Tatvavichar पर हम श्रीमद्भगवद्गीता को अध्याय दर अध्याय सरल, शुद्ध और गहन हिंदी में प्रस्तुत कर रहे हैं। यदि यह वीडियो आपके मन को थोड़ा भी शांत करे, आपको जीवन को नई दृष्टि से देखने में सहायता करे, तो इस वीडियो को Like ज़रूर करें। और अगर आप गीता के सम्पूर्ण ज्ञान को इसी क्रम और गहराई से सुनना चाहते हैं, तो Tatvavichar चैनल को Subscribe करना न भूलें। 📌 अगले वीडियो में: भगवदगीता अध्याय 3 – कर्म योग ॐ शांति: शांति: शांति:॥ #motivation #life #तत्त्वविचार #motivational #mindfulness #innerpeace #hindimotivation