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दोस्तों, ये वो सवाल है जो आज हर मां बाप के दिल में एक डर बनकर बैठा है। ये वो सवाल है जो हमारी सभ्यता, हमारे संस्कारों और हमारी इंसानियत पर एक बहुत बडा निशान खडा करता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? वो मां बाप जिन्होंने अपनी उंगली पकडकर चलना सिखाया, जिन्होंने अपने हिस्से की रोटी खिलाकर हमें बडा किया, जिन्होंने हमारी एक मुस्कान के लिए अपने हजार आंसू छुपाए, उन्ही मां बाप को बुढापे में, जब उन्हें हमारी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब कुछ बच्चे उन्हें घर से बाहर का रास्ता कैसे दिखा देते हैं? ये सोचना भी कितना तकलीफदेह है। बुढापा, दोस्तों, जिंदगी का वो पडाव है जहां इंसान जिस्म से कमजोर हो जाता है, लेकिन दिल से उसे सहारे की सबसे ज्यादा उम्मीद होती है। ये वो वक्त है जब उन्हें दवा से ज्यादा दुआ की, और खाने से ज्यादा अपनेपन की जरूरत होती है। वो मां बाप जिन्होंने हमें इस काबिल बनाया कि हम दुनिया में अपना नाम कमा सकें, जब उनका वक्त आता है, जब उनके हाथ कांपने लगते हैं, जब उनकी नजर कमजोर हो जाती है, तब वो अपनी औलाद में अपना बचपन, अपना सहारा ढूंढते हैं। वो ये नहीं कहते कि हमें दुनिया की सारी दौलत लाकर दे दो। वो बस इतना चाहते हैं कि कोई उनसे दो मीठे बोल बोल ले, कोई उनके पास बैठकर उनका हाल पूछ ले, कोई उन्हें ये अहसास दिला दे कि वो हम पर बोझ नहीं हैं। लेकिन जब इसी औलाद के दिल पत्थर हो जाते हैं, जब वो ये भूल जाते हैं कि वो आज जो कुछ भी हैं, उन्ही मां बाप की बदौलत हैं, तब इंसानियत शर्मसार हो जाती है। जब एक बेटा या बेटी अपने बूढे, लाचार मां बाप को घर से निकालता है, तो वो सिर्फ उन्हें घर से नहीं निकालता, वो अपनी जडों को उखाड फेंकता है। वो उस पेड की तरह हो जाता है जो अपनी जडों को काटकर खडा रहने की कोशिश कर रहा हो। वो ये भूल जाता है कि जिस घर की दीवारों को खडा करने में उसके मां बाप ने अपनी जिंदगी लगा दी, आज उसी घर में उनके लिए दो गज जमीन भी नहीं बची। ये जो सवाल है न, कि "कौन सी औलाद", ये बडा गहरा है। क्योंकि जब बच्चा पैदा होता है, तब वो एक कोरी स्लेट की तरह होता है। वो न अच्छा होता है, न बुरा। वो तो बस मां बाप की परछाई होता है। तो फिर ऐसा क्या होता है कि एक औलाद बुढापे में मां बाप के कदमों में अपनी दुनिया बिछा देती है, और दूसरी औलाद उन्ही मां बाप को दुनिया की ठोकरें खाने के लिए सडकों पर छोड देती है? क्या कमी परवरिश में रह जाती है? या ये वक्त का फेर है? या फिर ये पैसे और रिश्तों की उस लडाई का नतीजा है जिसमें हमेशा मां बाप हार जाते हैं? बेघर बुढ़िया ने बताया – कैसी औलाद बुढ़ापे में मां-बाप को घर से निकाल देती है। औलाद जब ये ३ काम करती है, तो मां-बाप को छोड़ देती है। एक बुढ़िया की सच्ची कहानी, जिसे सुनकर आत्मा कांप उठेगी। मां-बाप को घर से निकालने वाली औलाद का हाल क्या होता है? बुढ़िया का करारा जवाब – ऐसी औलाद को कुदरत भी नहीं छोड़ती! maa baap ki kahani buddhist story on parents maa baap ko ghar se nikalna emotional story in hindi karmic justice story maa baap ka tyag buddhist motivation story maa baap ka karz bodhi path story maa ki kahani in hindi budhape ki kahaniya Jiwan ki sachchai law of attraction in hindi maa ke aanshu budhapa kaisa hona chahiye karma aur bhagya me koun hai badha jiwan me khush kaise rahe jiwan me achha kaise soche jiwan kya hota hai best buddha motivational video in hindi hindi kahaniya best hindi story Bodhi Path video Hashtags: #bodhipath #Karma #LawOfKarma #BuddhaTeachings #budhapekikahani #aulaad #maabaapkikahani #bodhipathvideo #hindistory #besthindistories 🙏 Don't forget to like and share the video with your loved ones!