У нас вы можете посмотреть бесплатно श्री भद्रकाली योगिनी स्तोत्रम् | ध्यान, विनियोग, न्यास, अंगन्यास, फलश्रुति | Siddhi Stotra или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
इस वीडियो में प्रस्तुत है श्री भद्रकाली योगिनी स्तोत्रम्, जो कि एक तांत्रिक स्तोत्र है। इस पाठ में निम्नलिखित अंश सम्मिलित हैं — 🔸 ध्यान 🔸 विनियोग 🔸 न्यास एवं अंगन्यास 🔸 स्तोत्र पाठ 🔸 फलश्रुति भद्रकाली योगिनी उपासना साधक को रक्षा, वाक्सिद्धि, भय-नाश और साधना-सिद्धि प्रदान करती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से योगिनी साधना, तांत्रिक उपासना और देवी आराधना हेतु उपयोगी है। 🙏 श्रद्धा एवं नियमपूर्वक पाठ करें। 🔖 #BhadrakaliYogini #भद्रकालीयोगिनी #BhadrakaliStotram #YoginiSadhana #TantraSadhana #DeviStotra #KaliUpasana #ShaktiSadhana #64Yogini #MantraSadhana #SpiritualIndia #SanatanDharma #लेखरंजन __ ॥ श्रीभद्रकालीयोगिनीस्मरणस्तोत्रम् ॥ ॥ ध्यानम् ॥ करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं त्रिलोचनाम्। खड्गकपालहस्तां च रक्तवस्त्रावृतां शिवाम्॥ श्मशानवासिनीं देवीं नादबिन्दुस्वरूपिणीम्। भद्रकालीं महायोगिनीं ध्यायेत्सर्वार्थसिद्धये॥ ॥ विनियोगः ॥ ॐ अस्य श्रीभद्रकालीयोगिनीस्मरणस्तोत्रस्य । लेखरंजन ऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः । श्रीभद्रकालीयोगिनी देवता । ॐ बीजम् । ह्रीं शक्तिः । क्रीं कीलकम् । धर्मार्थकाममोक्षसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ ॥ करन्यासः ॥ ॐ भद्रकाली अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ह्रीं भैरवी तर्जनीभ्यां नमः क्रीं कराली मध्यमाभ्यां नमः ॐ योगिनी अनामिकाभ्यां नमः ह्रीं शक्ति कनिष्ठिकाभ्यां नमः क्रीं कालिका करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः॥ ॥ अंगन्यासः ॥ ॐ भद्रकालीशिरसे नमः ह्रीं भैरव्यै मुखे नमः क्रीं करालायै हृदि नमः ॐ योगिन्यै नाभौ नमः ह्रीं शक्त्यै गुह्ये नमः क्रीं काल्यै पादयोर्नमः॥ ॥ स्तोत्रम् ॥ नमस्ते भद्रकाले त्वं योगिनीनां शिरोमणिः। भवभयापहा देवि कृपया मां सदाऽवतु॥ रक्ताक्षि रक्तवसनां रक्तपुष्पप्रियां सदा। रक्तबीजविनाशिन्यै नमस्ते कालिके शुभे॥ ज्ञानशक्तिप्रदा देवि अज्ञानतमसापहा। लेखरंजनवाक्सिद्धिं देहि मे योगसंपदे॥ ॥ फलश्रुतिः ॥ इदं स्तोत्रं महापुण्यं भद्रकालीप्रियं सदा। यः पठेच्छ्रद्धया भक्त्या स याति भयमुक्तताम्॥ न रोगं न भयं तस्य न दारिद्र्यं कदाचन। वाक्सिद्धिर्जायते शीघ्रं योगिन्याः प्रसादतः॥ लेखरंजननामाङ्कं स्तोत्रं यः स्मरते नरः। तस्य विद्या च लक्ष्मीश्च स्थिरा भवति सर्वदा॥ __ ॥ श्री भद्रकाली योगिनी स्तोत्र पाठ-विधि ॥ 🔱 1. पाठ का समय रात्रि काल सर्वोत्तम (विशेषतः अर्धरात्रि के समीप) अमावस्या, अष्टमी, चतुर्दशी, मंगलवार या शुक्रवार विशेष फलदायी सामान्य पाठ हेतु प्रातः ब्रह्ममुहूर्त भी स्वीकार्य 🔱 2. स्थान एवं आसन शांत, एकांत स्थान पूजा-कक्ष या उत्तर/पूर्व मुख करके बैठें काला, लाल या ऊनी आसन श्रेष्ठ माना गया है 🔱 3. शुद्धि एवं तैयारी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें (लाल/केसरिया उत्तम) भूमि शुद्धि हेतु दीप प्रज्वलित करें मन को स्थिर कर तीन बार गहरी श्वास लें 🔱 4. संकल्प दाएँ हाथ में जल, पुष्प या अक्षत लेकर कहें — मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थं श्रीभद्रकालीयोगिनीप्रसादसिद्ध्यर्थं इदं स्तोत्रपाठं करिष्ये। 🔱 5. क्रमशः पाठ विधि पाठ निम्न क्रम से करें — 1️⃣ ध्यानम् — देवी के उग्र-करुण स्वरूप का मन में ध्यान 2️⃣ विनियोगः — उद्देश्य एवं संकल्प की पुष्टि 3️⃣ न्यासः — मंत्रों द्वारा शरीर में देवी शक्ति का आवाहन 4️⃣ अंगन्यासः — इन्द्रियों का शुद्धिकरण 5️⃣ स्तोत्र पाठ — पूर्ण श्रद्धा व स्पष्ट उच्चारण के साथ 6️⃣ फलश्रुतिः — अंत में अवश्य पढ़ें (पाठ को पूर्ण करता है) 🔱 6. जप संख्या सामान्य पाठ: 1 बार साधना हेतु: 3, 5 या 11 बार 21 दिन या 40 दिन का अनुष्ठान विशेष सिद्धिदायक 🔱 7. पाठ के नियम ✔️ पाठ के समय मौन एवं एकाग्रता रखें ✔️ बीच में उठना-बैठना न करें ✔️ स्तोत्र का अपमान या उपहास न करें ❌ मद्य, मांस, क्रोध, असंयम से बचें (विशेष साधना में अनिवार्य) 🔱 8. पाठ के बाद देवी से क्षमा-प्रार्थना करें दीप को पूर्ण जलने दें प्रसाद (फल, मिश्री, गुड़) अर्पित करें अंत में कहें — ॐ भद्रकाली योगिन्यै नमः॥ 🌺 विशेष संकेत यह स्तोत्र उग्र होते हुए भी रक्षक स्वरूप का है। भयभीत होने की आवश्यकता नहीं — श्रद्धा ही कवच है।