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LalKitab Bhagwat FB Group : / 456401272449595 लाल किताब 1952 में लिखा है कि ग्रह अपने से तीसरे घर को अचानक चोट मारता है चाहे वो दोस्त हो या दुश्मन । ये चोट हर साल नहीं होती। अचानक होती है। लेकिन कब होती है आज इस पर चर्चा करते है ! जब ये दोनों ग्रह (लागल कुंडली में जो खाना नंबर १ और ३ में हैं ) वर्षफल में आमने सामने आएंगे तब इनकी अचानक चोट की दृष्टि काम करेगी । आमने सामने की जो दृष्टि है वो घरों वाली दृष्टि (पेज102) होगी योग, बंधन वाली दृष्टि (A & B पेज112) नहीं! यानी ये दृष्टि जो 100, 50, 25 में समझाई गयी हैं! उसमें भी थोड़ा फर्क ये होगा कि इन दोनों ग्रहों में से जो ग्रह वर्ष फल में पहले घरों का होगा वो चोट करेगा और जो बाद के ग्रह में होगा वो चोट खायेगा । उदहारण के तौर पर खाना नबर 4 में शनि है और 6 में मंगल ! अब 17वें वर्ष 37वें वर्ष 44 और 52वें वर्ष में शनि -- मंगल को चोट देगा। और 35वे साल 48वें साल और 92वें वर्ष में मंगल -- शनि को चोट देगा । वर्षफल का शनि -- मंगल दृष्टि वाली चोट हानिकारक होती है क्यूंकि वहां ३रा सम्बन्ध फलित हो रहा है ! वर्षफल का मंगल -- शनि दृष्टि वाली चोट लाभदायक होती है क्यूंकि वहां ११वा सम्बन्ध फलित हो रहा है ! ऐसा मैंने फलित होते हुए देखा है ! Credit : Milakh Raj Bhagla ji (LalKitab Research Scholar)