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Shri Yamunaji ke 41 Pad 21-24, - શ્રી યમુનાજી ના 41 પદ, - पुष्टिमार्ग कीर्तन,Haveli Sangeet, Kirtans, Bhajans, Shotras, Mantras, Pushtimarg Kirtan, Ashtachap, Bhagwati Prasad Ghandarva, Pushtimarg, Pushtimargiye Sangeet, SUR SAGAR, KIRTANKAR: Pt. BHAGWATI PRASAD Kirtans by: Bhagwati Prasad 00:00 पद 21 - नाम महिमा ऐसीजु जानो 05:53 पद 22 - भक्तको सुगम श्रीयमुने अगम ओरें 11:41 पद 23 - फल फलित होय फलरूप जाने 17:31 पद 24 - श्रीयमुने पति दासके चिन्ह न्यारे पद संख्या 21 नाम महिमा ऐसो जु जानो, मर्यादादिक कहे, लौकीक सुख लहे; पुष्टि को पुष्टि पथ निश्चय मानो. स्वाति जल बुंद जब परत है जाहि मे, ताहिमे होत तैसो जु बानो; श्री यमुने कृपासिन्धु जानी स्वाति जल बहुमानि, 'सुर'गुण पुर, कहांलो बखानों. पद संख्या 22 भक्तको सुगम, श्री यमुने अगम ओरें, प्रात:ही नहात, अघ जात ताके सकल; यमहुं रहत ताहि हाथ जोरे. अनुभवि बिना अनुभव कहा जा नही, जा को पिया नही चित्त चोरे; प्रेमके सिन्धुको मरम जान्यो नही, 'सुर'कहे, कहा भयो देह बोरे. पद संख्या 23 फल फलित होय फलरूप जाने, देखीहुं ना सुनी, ताहीकी आपुनी; काहुकी बात कोऊ कैसे जु माने. ताके हाथ निरमोल नग दिजीये, जोई नीके करि परखि जाने; 'सुर'कहे क्रूरतें दूर बसीये सदा, श्री यमुनाजी को नाम लिजे जु छाने. पद संख्या 24 श्री यमुने पति दास के चिन्ह न्यारे, भगवदियो कों भगवत्संग मिली रहत है; जा के हिय बसत प्राण प्यारे. गुढ श्री यमुने बात सोई अब जानही, जा के मनमोहन नैन तारे; 'सुर'सुखसार निरधार वे पावही, जा पर होय श्री वल्लभ कृपा रे.