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१) महायज्ञको मुख्य उद्देश्य र धार्मिक महत्व मुख्य उद्देश्य पाँच उग्र महापापको निवारण तथा प्रायश्चित गराउनु राष्ट्र, समाज र व्यक्तिको कल्याणका लागि शान्ति, सद्भाव र सकारात्मक ऊर्जा स्थापना धार्मिक चेतना, नैतिकता र संस्कारको संरक्षण धार्मिक महत्व पशुपति क्षेत्र हिन्दूहरूको विश्वकै पवित्र तीर्थस्थलमध्ये एक भएकाले यहाँ गरिने यज्ञलाई विशेष पुण्यदायी मानिन्छ। महायज्ञलाई “सामूहिक प्रायश्चित” को रूपमा लिइन्छ—व्यक्तिगत र सामाजिक स्तरमा भएका त्रुटि तथा पापबाट मुक्ति पाउने आस्था जोडिएको हुन्छ। वैदिक मन्त्र, हवन र पूजाबाट वातावरण शुद्ध हुने तथा आध्यात्मिक शक्ति जागृत हुने विश्वास गरिन्छ। २) राष्ट्र शान्तिमा यस महायज्ञको योगदान सामूहिक प्रार्थना: हजारौं भक्तजनको एकै उद्देश्यका लागि गरिएको प्रार्थनाले सामाजिक एकता र सद्भाव बढाउँछ। आध्यात्मिक चेतना: हिंसा, द्वेष र विकृतिबाट टाढा रहन प्रेरणा दिँदै नैतिक समाज निर्माणमा सहयोग पुर्याउँछ। सकारात्मक ऊर्जा: वैदिक यज्ञ, मन्त्र उच्चारण र हवनले वातावरण शुद्ध भई मानसिक शान्ति र सकारात्मक सोच बढ्ने धार्मिक मान्यता छ। राष्ट्रिय भावनाको सुदृढीकरण: “राष्ट्रशान्ति” भन्ने मूल भावनाले सबैलाई देशप्रति जिम्मेवार बनाउने सन्देश दिन्छ।