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महादानी मंदिर बेडो रहस्यम अनसुनी गुत्थी #Umeshvolgs1 #mahadanibero #bero #volgs #umeshranchi रांची जिले अंतर्गत बेड़ो प्रखंड के ऐतिहासिक महादानी मंदिर के बारे में झारखंड के लोगों को बहुत कम जानकारी है। इसका निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार 1048 से 1100 ईसवी के बीच महादानी मंदिर की रचना हुई। भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर की अनुकृति में बना महादानी मंदिर में द्रविड़ व नागर शैली का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। पौराणिक कथा व दंत कथाओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने खुद अपने हाथों से महादानी मंदिर की रचना की है। पुरातत्वविदों के शोध पत्र में महादानी मंदिर का निर्माण पाल वंश के शासक धर्मपाल के शासन काल के दौरान बताया गया है। बेड़ो कॉलेज के इतिहास विभाग के विद्वानों ने भी मंदिर की रचना पाल वंश के समय की बताते है। शोध पत्र में महादानी मंदिर के चारों ओर कुछ दूरी पर महादानी मंदिर के अनुरूप छोटे-छोटे मंदिर के निर्माण का जिक्र किया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार डुकू तालाब के समीप पुरातात्विक खुदाई के बाद कई रहस्यों से पर्दा उठ सकता है। महादानी मंदिर में जलाभिषेक का जल सीधे जमीन के अंदर से डुकू तालाब में जाकर गिरता था, लेकिन मानवीय हस्तक्षेप के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई। महादानी मंदिर की रचना लाल रंग के बजरी पत्थर से हुई है। तब चट्टानों को काटकर चुना, सुर्खी व अन्य तत्वों से जोड़कर मंदिर की रचना की गई। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां का पुजारी कोई पंडित न होकर गांव का पाहन है। आज भी आदिवासियों व स्थानीय लोगों के बीच महादानी मंदिर के प्रति आस्था व विश्वास कायम है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना महादानी बाबा पूरी करते हं। गांव के सभी लोग महादानी मंदिर में गोयंदा व गोयंदी यानी शिव-पार्वती के नाम से मंदिर में महादानी बाबा को नए चावल से बने पीठा का भोग चढ़ाते हं व नई फसल का उपयोग करते हैं। सावन में पूरे माह में लोग भोले बाबा का जलाभिषेक भी करते हैं। UMESHRanchi Umesh volgs Umesh vlogs Volgs ranchi Volgs Umesh Umesh kumar Umesh mahto Umesh volgs Umesh Ranchi Umesh volgs Bloge Umesh Dally bolge Bloge Umesh Umesh