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तृणावर्त लीला और पाप के विनाश का सिद्धांत आंधी आई थी… धूल, अंधकार और भ्रम लेकर। पर ब्रज में जिसने जन्म लिया है, वह केवल खेलते-खेलते भी अधर्म का अंत कर देता है। यह अद्भुत प्रसंग भागवत पुराण में वर्णित है, जहाँ तृणावर्त नामक दैत्य श्रीकृष्ण को आकाश में ले जाता है — पर अंततः स्वयं ही नष्ट हो जाता है। इस दिव्य प्रवचन में स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज तृणावर्त लीला के भीतर छिपे पाप विनाश के गूढ़ सिद्धांत को उजागर करते हैं। ▪ तृणावर्त — अहंकार और भ्रम का प्रतीक ▪ धूलभरी आँधी — विवेक पर पड़े अज्ञान का आवरण ▪ भगवान का “भारी” हो जाना — सत्य का भार ▪ पाप का अंत — भीतर से या बाहर से? ▪ ब्रज की शरणागति और मातृत्व की पुकार ▪ लीला के माध्यम से धर्म की स्थापना स्वामीजी बताते हैं कि पाप बाहर से शक्तिशाली दिखता है, पर जब जीव भगवान को हृदय में धारण करता है, तो वही भगवान इतना “गंभीर” हो जाते हैं कि अधर्म टिक नहीं पाता। तृणावर्त हमें सिखाता है — अहंकार जितना ऊपर उठाता है, उतना ही तेजी से गिराता भी है। यह वीडियो केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत है — जब तक ईश्वर स्मरण है, पाप का विनाश निश्चित है। 🙏 यदि यह लीला आपके हृदय को छू जाए, तो वीडियो को Like करें, Share करें और ऐसे गूढ़ शास्त्रीय प्रवचनों के लिए Channel को Subscribe करें। सियाराम मैं सब जग जानी 🙏 जय नंदलाल 🙏 #Trinavarta #KrishnaLeela #Bhagavatam #SanatanDharma #BhaktiMarg #SwamiRaghavacharya #BrajLeela #DivineJustice #VedanticWisdom #SpiritualIndia