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एसोफेगस, गले, हार्ट, पेट, और भोजन नली में dekha जा सकता है बहुत बार ऐसा होता है जब मरीज किसी समस्या से जूझ रहा होता है और लंबे इलाज और दवा के सेवन के बाद भी उसे आराम नहीं मिलता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर एंडोस्कोपी टेस्ट का सहारा लेते हैं। लेकिन एंडोस्कोपी टेस्ट होता क्या है? एंडोस्कोपी को आप यूं समझ सकते हैं कि यह एक ऐसी मशीन होती है जो पतली नली जैसी दिखती है और इसके आगे एक छोटा सा कैमरा लगा होता है। डॉक्टर इसे मरीज के मुंह के माध्यम ये गले में डालते हैं और शरीर में क्या समस्या है ये देख पाते हैं। एंडोस्कोपी क्यूँ करते हैं ? ख़ास लक्षणों के देखें जाने पर कि जाती है, जिनमें कुछ इस प्रकार हैं पेट में अलसर/ छाले पाचन तंत्र से खून का बहना आंतों के सूजने पर लंबे समय से कब्ज होने पर (Constipation) पित्ताशय की पथरी रसौली अगराशय शोध ग्रासनली में रूकावट एंडोस्कोपी की मदद से डॉक्टर किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण को सही ढंग से समझ पाते हैं | यहाँ तक की विशेष परिस्थितियों में उतक का अंश लेकर , उसका विश्लेषण करने के लिए लैब में भेजा जाता है। एंडोस्कोपी कैसे की जाती है? प्रक्रिया से पहले रोगी को 6 से 8 घंटे तक उपवास पर रखा जाता है। रोगी को उनकी पीठ या उनकी तरफ लेटने के लिए कहा जाता है। प्रक्रिया के दौरान रोगी की सांस लेने की दर, रक्तचाप और हृदय गति पर नज़र रखने के लिए शरीर से विभिन्न मॉनिटर जुड़े होते हैं। रोगी को आराम देने और प्रक्रिया को आरामदायक बनाने के लिए बांह के अग्र भाग में शिरा के माध्यम से शामक दिया जा सकता है। एंडोस्कोप को फिर मुंह के माध्यम से या संकेत के अनुसार एक चीरा के माध्यम से पारित किया जाता है। मुंह में डालने पर डॉक्टर आपको निगलने के लिए कहेगा। इस प्रक्रिया के दौरान गले में हल्का दबाव महसूस हो सकता है, लेकिन इसमें दर्द नहीं होना चाहिए। एंडोस्कोप रोगी की सांस लेने में हस्तक्षेप नहीं करेगा, हालांकि एंडोस्कोप मुंह के अंदर होने के बाद रोगी बात नहीं कर पाएगा। एक बार जब एंडोस्कोप अन्नप्रणाली (भोजन नली) से नीचे चला जाता है, तो डॉक्टर देखेंगे कि मॉनिटर के माध्यम से पाचन तंत्र में कोई असामान्यता है या नहीं, जो सीधे एंडोस्कोप की नोक पर छोटे कैमरे से जुड़ा होता है। यदि कोई असामान्यता दिखाई देती है, तो डॉक्टर भविष्य के संदर्भ के लिए इन छवियों को रिकॉर्ड करेंगे।