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Cocopeat buffering with calcium nitrate आप सभी को एक सलाह देना चाहूंगा कि अडेनियम के लिए potting मिक्स बनाते समय उसमें कोकोपीट न मिलाएं, क्योंकि बरसात के समय और सर्दियों के समय कोकोपीट की वजह से गमले में ज्यादा पानी रुकता है जिससे अडेनियम की जड़ों में रूट रोट यानी जड़ गलन की समस्या आती है, इसलिए अडेनियम के लिए potting mix बनाते समय उसमें कोकोपीट बिल्कुल भी ना मिलाएं। नये गमलों को भरने के लिए अब मैं मिट्टी नहीं लाता क्योंकि अब जब भी मुझे नए गमले भरने के लिए मिट्टी की जरूरत होती है तो मैं कोकोपीट की दो या तीन ब्रिक्स ले आता हूं, और पुराने पॉटिंग मिक्स को उसके साथ मिक्स कर देता हूं, जिससे नए गमलों को भरने लायक पॉटिंग मिक्स तैयार हो जाता है। बरसात के समय कोकोपीट लाने के 2 फायदे हैं। पहला तो ये कि कोकोपीट को मैंने छत में रख दिया था जिससे बारिश के पानी की वजह से कोकोपीट एक्सपेंड हो गई इसलिए अब इसको भीगाने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरा ये की कोकोपीट का पीएच न्यूट्रल होता है और बारिश के पानी का पीएच स्लाइटली एसिडिक होता है। बारिश के पानी में भीगने की वजह से कोकोपीट का पीएच भी हल्का सा एसिडिक हो जाएगा जिसकी वजह से पेड़ पौधे आसानी से पोषक तत्वों को ग्रहण कर पाएंगे। कोकोपीट इस्तेमाल करने के बोहोत से फायदे हैं। जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि कोकोपीट का पीएच न्यूट्रल होता है यानी इसका ph नाही एसिडिक होती है और ना ही एल्केलाइन, इसलिए जब इसे पॉटिंग मिक्स में मिलाया जाता है तो ये potting mix के पीएच को नहीं बदलती। पूरी तरह से भीग जाने के बाद भी कोकोपीट में लगभग 22% हवा रहती है, जोकि जड़ों के अच्छे विकास के लिए बहुत आवश्यक है। जिस पॉटिंग मिक्स में कोकोपीट मिलाई जाती है उसमें कम पानी देने की जरूरत होती है। और सबसे जरूरी बात कि ये नारियल के छिलकों से बनाई जाती है, जिससे वेस्ट को कम करने में मदद मिलती है और ये 100% इको फ्रेंडली है। लेकिन अगर आप कोकोपीट को धोकर उसे ऐसे ही पॉटिंग मिक्स में मिलाते हैं तो उससे एक समस्या हो सकती है। उस समस्या का कारण है कोकोपीट में ज्यादा मात्रा में सोडियम और पोटेशियम का होना और सिर्फ पानी से धोने के बाद भी इनकी मात्रा में कमी नहीं आती। अब आप सोच रहे होंगे की पोटेशियम तो पौधों के लिए बहुत जरूरी होता है, इससे क्या समस्या हो सकती है। पोटेशियम पौधों के लिए जरूरी है लेकिन जरूरत से ज्यादा मात्रा में पोटेशियम होने से पौधे मैग्नीशियम ग्रहण नहीं कर पाते। और दूसरी तरफ सोडियम तो पौधों के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता। इसलिए कोकोपीट में सोडियम और पोटेशियम की मात्रा को कम करने के लिए एक रासायनिक क्रिया की जाती है जिसे buffering कहते हैं। जिसमें कैल्शियम नाइट्रेट का इस्तेमाल करके सोडियम और पोटेशियम को कैल्शियम के साथ रिप्लेस किया जाता है।