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दारुल उलूम देवबंद की ऐतिहासिक मस्जिद-ए-रशीद का भरा हुआ सहन , रमज़ान का दूसरा जुमा, मुफ्ती अफ्फान मंसूरपुरी की दिल छू लेने वाली तिलावत और दुआ … और फिर शुरू हुई नमाजियों पर पुष्प वर्षा — पूरा शहर देखता रह गया! ऐतिहासिक देवबंद की शान मानी जाने वाली मस्जिद-ए-रशीद में रमज़ान के दूसरे जुमा पर आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा। नमाज़-ए-जुमा से काफी पहले ही विशाल पूर्वी सहन नमाज़ियों से खचाखच भर गया। पहली और दूसरी मंज़िल पूरी तरह भर चुकी थीं, हालात ऐसे थे कि देर से आने वालों को सहन में भी मुश्किल से जगह मिल पाई। पूरा परिसर रूहानियत और अदब के रंग में डूबा दिखाई दिया। जब मुफ्ती अफ्फान मंसूरपुरी ने जुमा की नमाज़ अदा कराई तो उनकी प्रभावशाली तिलावत और बयान ने माहौल को भावुक कर दिया। नमाज़ के बाद उन्होंने देश में अम्नो-अमान, भाईचारे और तरक़्क़ी के लिए विशेष दुआ कराई। इसके पश्चात वे बाहर निकले तो स्थानीय और दूर-दराज़ से आए अकीदतमंदों ने उनसे मुलाकात की। मुसाफ़ा और दुआओं का सिलसिला देर तक चलता रहा, हर व्यक्ति उनके करीब जाकर दुआ लेने को उत्सुक दिखा। लोगों ने अपने बच्चों के सरो पर हाथ रखवाया और उनके हक में दुआओं की दरख्वास्त की । नमाज़ के उपरांत मस्जिद के बाहर भाईचारे की अनोखी तस्वीर देखने को मिली, जब गैर-मुस्लिम नागरिकों ने नमाज़ियों पर पुष्प वर्षा कर सद्भाव का संदेश दिया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत अमरपाल शर्मा और संदीप कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने सुबह से ही नगर में पैदल गश्त कर व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा, जिसकी स्थानीय लोगों ने सराहना की। देवबंद ने एक बार फिर साबित किया कि यह शहर सिर्फ इल्म की सरज़मीं नहीं, बल्कि अमन, एकता और पारस्परिक सम्मान की भी मिसाल है।