У нас вы можете посмотреть бесплатно चैतुरगढ़ Chaiturgarh, जिसे लाफागढ़ (Lafagarh) के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ के कोरबा или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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चैतुरगढ़ (Chaiturgarh), जिसे लाफागढ़ (Lafagarh) के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और बहुत ही सुंदर पर्यटन स्थल है। इसे छत्तीसगढ़ के 36 किलों में से सबसे सुरक्षित और 'अभेद्य किला' माना जाता है। यहाँ चैतुरगढ़ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गई हैं: 🏰 ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व स्थान: यह कोरबा शहर से लगभग 70 किलोमीटर दूर पाली तहसील के पास स्थित है। ऊँचाई: यह समुद्र तल से लगभग 3,060 फीट की ऊँचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। निर्माण: इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में कलचुरी वंश के राजा पृथ्वीदेव प्रथम ने करवाया था। प्राकृतिक किला: इसे 'नेचुरल फोर्ट' कहा जाता है क्योंकि इसकी दीवारें प्राकृतिक रूप से खड़ी चट्टानों से बनी हैं। यहाँ तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं: मेनका द्वार (Menaka Dwar) हुंकारा द्वार (Humkara Dwar) सिंह द्वार (Simhadwar) 🕉️ मुख्य आकर्षण (Main Attractions) महिषासुर मर्दिनी मंदिर: किले के ऊपर माता महिषासुर मर्दिनी का प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ माता की 12 भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है। नवरात्रि के दौरान यहाँ बहुत भीड़ होती है। शंकर गुफा: मंदिर से कुछ दूरी पर एक गुफा है जो सुरंग जैसी है। इसमें प्रवेश करने के लिए झुककर या लेटकर जाना पड़ता है। तालाब: पहाड़ी के ऊपर समतल मैदान है जहाँ 5 तालाब हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इतनी ऊँचाई पर होने के बावजूद इनमें से कुछ तालाबों में हमेशा पानी रहता है। प्राकृतिक सुंदरता: यहाँ से चारों तरफ घने जंगल और पहाड़ियों का नजारा बहुत ही अद्भुत दिखता है। इसे अक्सर 'छत्तीसगढ़ का कश्मीर' भी कहा जाता है (हालाँकि यह उपनाम चैतुरगढ़ और मैनपाट दोनों के लिए इस्तेमाल होता है)। 🚗 कैसे पहुँचें? (How to Reach) रास्ता: आपको पहले कोरबा या बिलासपुर से पाली (Pali) आना होगा। पाली से चैतुरगढ़ के लिए रास्ता जाता है। ट्रेकिंग: पहाड़ी के ऊपर तक जाने के लिए घुमावदार रास्ता है। कार या बाइक से ऊपर तक जाया जा सकता है, लेकिन कुछ हिस्सा पैदल (सीढ़ियों से) चढ़ना पड़ता है। 💡 जरूरी सुझाव खाना-पानी: ऊपर खाने-पीने की दुकानों की कमी हो सकती है, इसलिए अपना भोजन और पानी साथ लेकर जाना बेहतर है। समय: शाम होने से पहले नीचे उतरना सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा है। क्या आप चैतुरगढ़ जाने के लिए सही रास्ते या आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थलों (जैसे पाली का शिव मंदिर) के बारे में जानना चाहते हैं?