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देवबंद की ऐतिहासिक मस्जिद Jama Masjid Deoband में रमज़ान की 21वीं शब पर एक अहम बयान सामने आया, जिसमें मशहूर आलिमे दीन Mufti Affan Mansoorpuri ने मुसलमानों को सुन्नत पर अमल और ईमान की मजबूती के बारे में नसीहत की। अपने बयान में उन्होंने कहा कि अगर इंसान सच्चे दिल से सुन्नत पर अमल करे और ईमान के तकाज़ों को पूरा करे, तो अल्लाह तआला दुश्मनों के दिलों में भी उसका ऐसा खौफ पैदा कर देता है कि वे नज़र मिलाने की हिम्मत तक नहीं कर पाते। उन्होंने यह भी समझाया कि इस्लाम किसी से बेवजह झगड़ा करने या मुकाबले की तमन्ना रखने की तालीम नहीं देता। इंसान को चाहिए कि वह अमन और सब्र के साथ जिंदगी गुज़ारे और बिना वजह किसी से उलझने से बचे। लेकिन अगर ऐसी नौबत आ जाए कि कोई इंसान की जान, माल या उसके बीवी-बच्चों पर हमला कर दे और बचने का कोई रास्ता न बचे, तब इंसान को डरना नहीं चाहिए। ऐसे मौके पर बहादुरी और सब्र के साथ अपने हक और अपनी हिफाज़त के लिए खड़ा होना चाहिए। बयान के दौरान उन्होंने इस मशहूर हदीस का भी जिक्र किया कि “जन्नत तलवार के साए में है”, जिसका मतलब यह बताया जाता है कि जब इंसान मजबूरी की हालत में अपने दीन, अपने घर और अपनी इज्जत की हिफाज़त करता है, तो वह अल्लाह की राह में सब्र और हिम्मत का सबूत देता है। रमज़ान की मुबारक रातों में होने वाले ऐसे बयान लोगों के दिलों को झकझोर देते हैं और उन्हें अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की तरफ ध्यान दिलाते हैं। देवबंद में भी इस बयान को सुनने के लिए बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे और उन्होंने इस नसीहत को गौर से सुना। यह वीडियो उसी बयान का अहम हिस्सा है, जिसमें ईमान, सब्र, अमन और जरूरत पड़ने पर अपने हक की हिफाज़त की बात कही गई है।