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🙏 जय कबीर साहेब! (Sat Saheb Ji) 🙏 आज की पवित्र सुबह की शुरुआत कीजिये संत कबीर दास जी के इस अद्भुत चेतावनी भजन के साथ। "उठ जाग मुसाफिर" सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि जीवन की एक गहरी सच्चाई है जो हमें अज्ञान की नींद से जगाती है। अगर यह भजन आपके दिल को छू जाए, तो वीडियो को Like 👍 करें और इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ Share 🔄 जरूर करें। 🎧 *Song Credits:* Title: Uth Jaag Musafir Bhor Bhai (उठ जाग मुसाफिर) Category: Kabir Bhajan / Chetawani Shabd Lyrics: Traditional & Sant Kabir Das Ji Label: Kabir Bhajan Gyan --- 📜 *Bhajan Lyrics (भजन के बोल):* (दोहा) आया है सो जायेगा, राजा रंक फकीर। एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बंधे ज़ंजीर॥ (स्थाई) उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है। जो सोवत है वो खोवत है, जो जागत है वो पावत है॥ (अंतरा 1) टुक नींद से अंखियाँ खोल ज़रा, और अपने प्रभु से ध्यान लगा। यह प्रीति करन की रीत नहीं, प्रभु जागत है तू सोवत है॥ (अंतरा 2) यह सुंदर काया माटी की, जिस पर तू इतना मगन हुआ। बिन पंछी के जैसे पिंजरा, ख़ाली पड़ा फिर रोवत है॥ (अंतरा 3) सत्संग की गंगा बहती है, तू नहाय ले गोते खाय ले। फिर अवसर ऐसा नहीं मिले, क्यों दाग पाप के धोवत है॥ (अंतरा 4) जो कल करना वो आज कर ले, जो आज करना वो अब कर ले। जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया, फिर पछताये क्या होवत है॥ (अंतरा 5) नादान भुगत करनी अपनी, ऐ पापी पाप में चैन कहाँ। जब पाप की गठरी सीस धरी, फिर सीस पकड़ क्यों रोवत है॥ (अंतरा 6) यह महल खज़ाने, धन-दौलत, सब यहीं धरा रह जायेगा। जब हंस अकेला उड़ जाये, कोई साथ नहीं तेरे जायेगा॥ (अंतरा 7) यह श्वासों की पूंजी तेरी, पल-पल में घटती जाती है। कर ले सत्कर्म कमाई तू, यह देह है काँच की चूड़ी रे। (अंतरा 8) कहत कबीर सुनो भाई साधो, अब भी समय है चेत ज़रा। नाम की नैया पार लगा दे, तू मांझी उसको बना तो सही। (समापन दोहा) माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय। एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूँगी तोय॥ --- 📧 *Contact / Business Enquiries:* dilpreetsinghgill273@gmail.com --- 🔔 *Subscribe for more:* ऐसे ही और रूहानी भजनों के लिए हमारे चैनल *'Kabir Bhajan Gyan'* को सब्सक्राइब करें और घंटी 🔔 का बटन दबाएं। धन्यवाद! #KabirBhajan #UthJaagMusafir #MorningBhajan #KabirAmritwani #SantKabir #ChetawaniBhajan #BhaktiSong #KabirBhajanGyan #MeditationMusic