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श्री मृत्युञ्जय स्तोत्रम् | अकाल मृत्यु को समाप्त करनेवाला स्तोत्र | Shri Mrityunjaya Stotram by Balram Pandey with Pure Sanskrit Lyrics 🕉🙏 महाकुम्भ 2025 🪷 के दिव्य अवसर पर भारत वैष्णव सेवाश्रम संघ के तत्वावधान में देव भूमि कुम्भनगरी तीर्थराज प्रयाग में आप अवश्य आइए। यहाँ आप साधु, सन्त, अतिथिवृन्द, अन्नक्षेत्र संचालनार्थ, विविध यज्ञ भण्डारा सम्पन्नार्थ दान स्वरूप धन राशि समर्पित कर अनंत पुण्य एवं यश के भागी बनिए। दान करने की विधि:- Online Donation:- Upi number- 8271999095 / 9113189606 Paypal- paypal.me/SRINIVASPandey765 Donate Online: https://rzp.io/rzp/RNbYaGY2 Bank Donation:- Bank account holder- Balram Pandey Bank account number- 80628100001684 Bank account name- Bank Of Baroda IFSC Code- BARB0DBBAKH अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें - 7295841147 / 9113189606 ।। श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रम् ।। रत्नसानुशरासनं रजताद्रिशृङ्गनिकेतनं शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम् । क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवन्दितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ १ ॥ पञ्चपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम् । भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ २ ॥ मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरं पङ्कजासनपद्मलोचनपूजिताङ्घ्रिसरोरुहम् । देवसिद्धतरङ्गिणीकरसिक्तशीतजटाधरं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ३ ॥ कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनं नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्। अन्धकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ४ ॥ यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजङ्गविभूषणं शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम् क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ५ ॥ भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं दक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्। भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ६ ॥ भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरं सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम् । भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ७ ॥ विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं संहरन्तमथ प्रपञ्चमशेषलोकनिवासिनम्। क्रीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमावृतं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ८ ॥ रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ ९ ॥ कालकण्ठं कलामूर्तिं कालाग्निं कालनाशनम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ १० ॥ नीलकण्ठं विरूपाक्षं निर्मलं निरुपद्रवम् । नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ ११ ॥ वामदेवं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ १२ ॥ देवदेवं जगन्नाथं देवेशमृषभध्वजम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ १३ ॥ अनन्तमव्ययं शान्तमक्षमालाधरं हरम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ १४ ॥ आनन्दं परमं नित्यं कैवल्यपदकारणम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ १५॥ स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणम् । नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति ॥ १६ ॥ ॥ श्रीपद्ममहापुराणान्तर्गत उत्तरखण्डे श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रम् ॥ Join us:- Telegram Group = https://t.me/BalramPandeySanskrit Email- sanskritbalram@gmail.com #shiv #mahadev #sanatandharma #sanskrit #stotram #balrampandeysanskrit