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1955 में मशहूर शास्त्रीय संगीत के गायक डीवी पलुस्कर का निधन हुआ था। मात्र दस वर्ष की उम्र में पलुस्कर ने पंडित विनायकराव पटवर्धन और पंडित नारायणराव व्यास से शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा ली थी। इन्होंने पंजाब में हुए हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में अपनी गायकी की पहली प्रस्तुति दी थी। विरासत में इन्हें ग्वालियर घराना और गंधर्व महाविद्यालय मिला था, लेकिन पलुस्कर अन्य घरानों और शैलियों को अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। डीवी पलुस्कर शास्त्रीय गायक के अलावा भजन गायक के रूप में भी मशहूर थे। 1952 में रिलीज़ हुई फिल्म बैजू बावरा में उस्ताद अमीर ख़ान और डीवी पलुस्कर की जुगलबंदी को खूब पसंद किया गया। 1956 में हंगरी की क्रांति के दौरान प्रदर्शनकारियों और सोवियत सेना के बीच भीषण लड़ाई शुरू हुई थी। हंगरी के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरे नेगी ने जारी लड़ाई के तीसरे दिन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में सबसे भीषण लड़ाई हुई, जिसमें क़रीब पांच हज़ार लोगों के मारे जाने की खबर थी। प्रधानमंत्री नेगी को पिछले वर्ष उनकी उदारवादी नीतियों की वजह से पद से हटा दिया गया था, लेकिन दो दिन पहले ही कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने प्रदर्शन और विद्रोह को शांत करवाने के लिए उन्हें दोबारा प्रधानमंत्री बना दिया था। प्रदर्शनकारी आर्थिक सुधार और सोवियत टैंकों को हटाने की मांग कर रहे थे। इमरे नेगी ने इन मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था। हंगरी में आंदोलन में क़रीब एक लाख छात्रों और कामगारों ने राजधानी की सड़कों पर लोकतंत्र के समर्थन में रैली की थी। पुलिस ने गोलीबारी के ज़रिए भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश भी की थी, लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया तो सरकार ने सोवियत टैंकों को सड़कों पर उतारने का आदेश दे दिया। 1994 में इज़राइल और जॉर्डन के बीच शांति समझौता हुआ था। 46 साल से जारी युद्ध को इज़राइल और जॉर्डन ने आपसी सहमति से खत्म करने पर सहमति जताई। इज़राइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री यित्ज़ाक रेबिन और जॉर्डन के सुल्तान हुसैन ने शांति समझौते पर दस्तख़त किए थे। इस ऐतिहासिक मौक़े पर अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भी मौजूद थे। क़रीब पांच हज़ार मेहमानों की मौजूदगी में हुई इस संधि को विश्वभर में टीवी पर प्रसारित किया गया था। हालांकि इस मौक़े पर तत्कालीन फ़िलस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात को निमंत्रण नहीं दिया गया था। इस समझौते के साथ ही जॉर्डन, मिस्र के बाद इज़राइल के साथ रिश्ते सुधारने वाला दूसरा अरब मुल्क बन गया था। 1979 में मिस्र ने इज़राइल के साथ शांति स्थापना की थी। दक्षिणपंथियों को छोड़कर इज़राइली नागरिकों ने इस समझौते का स्वागत किया था और देश की संसद नेसेट ने इसे बहुमत से पारित किया था। हालांकि फ़िलस्तीनी नागरिक इस समझौते से खुश नहीं थे। उनका मानना था कि समझौते में उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसके बाद फ़िलस्तीनियों ने संधि के ख़िलाफ़ येरुशलम और पश्चिमी तट के इलाक़ों में आम हड़ताल और प्रदर्शन कर अपना विरोध ज़ाहिर किया था। 2015 में उत्तर पूर्वी अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप के झटके को दिल्ली, श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के साथ ही उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी महसूस किया गया था। राजस्थान के कई हिस्सों में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप में क़रीब 398 लोगों की मारे जाने की ख़बर थी जबकि 2,536 लोग घायल हुए थे। अफगानिस्तान के तखार प्रांत में भूकंप के बाद एक स्कूल में मची भगदड़ में 12 छात्राओं की मौत हो गई थी। हिंदूकुश पर्वतों को संस्कृत में पारियात्र पर्वत के नाम से जाना जाता था। जब इस क्षेत्र में सम्राट सिकंदर ने युद्ध जीता था, तो इन पर्वतों को यूनानी भाषा में कौकासोश इंदिकौश नाम से जाना गया। धीरे-धीरे इन पर्वतों का नाम बदलते-बदलते हिंदूकुश हो गया। हिंदू कुश पामीर पर्वतों से जुड़ते हैं और हिमालय की उपशाखा माने जाते हैं। यहां के पहाड़ों की ऊंचाई काफी अधिक है इसके बावजूद यहां लोगों का आना-जाना काफी पुराने समय से बना हुआ है।