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राइजोबियम (Rhizobium) एक लाभकारी जीवाणु (बैक्टीरिया) है जो विशेष रूप से दलहनी फसलों (जैसे चना, मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन आदि) के साथ सहजीविता (symbiosis) करता है। यह जीवाणु जड़ों की गांठों (root nodules) में वास करता है और वातावरण से नाइट्रोजन लेकर पौधों को उपलब्ध कराता है। ✅ राइजोबियम का फसल में उपयोग: बीजोपचार के रूप में: 1 किलोग्राम बीज के लिए लगभग 5 से 10 ग्राम राइजोबियम कल्चर का प्रयोग करें। बीज को पहले किसी चिपकने वाले घोल (जैसे गुड़ या स्टिकर) से गीला करें, फिर राइजोबियम कल्चर को अच्छी तरह मिलाकर छाया में सुखाएं और तुरंत बुवाई करें। मृदा उपचार के रूप में: राइजोबियम कल्चर को कंपोस्ट या गोबर खाद में मिलाकर खेत में बुवाई से पहले डाल सकते हैं। 🌾 राइजोबियम के उपयोग से होने वाले लाभ: ✅ नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation): वातावरण की मुक्त नाइट्रोजन को पौधे के उपयोग योग्य अमोनिया में बदलता है। रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों की आवश्यकता को कम करता है। ✅ उपज में वृद्धि: दलहनी फसलों की 10-25% तक उपज बढ़ाई जा सकती है। ✅ मिट्टी की उर्वरता में सुधार: फसल कटाई के बाद भी जड़ों में बची हुई नाइट्रोजन मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है। ✅ लागत में कमी: कम रासायनिक खाद की आवश्यकता से उत्पादन लागत घटती है। ✅ पर्यावरण अनुकूल: जैविक कृषि के लिए उपयुक्त, मिट्टी एवं जल प्रदूषण नहीं करता। 🎯 महत्वपूर्ण सुझाव: बीजोपचार के बाद बीज को धूप में न सुखाएं। राइजोबियम का उपयोग फसल विशेष कल्चर के अनुसार करें (उदाहरण: चने के लिए Rhizobium ciceri, मूंग के लिए Rhizobium radiobacter आदि)। रासायनिक खाद और फफूंदनाशकों के साथ एकसाथ प्रयोग न करें।