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क्या हम सच जानते हुए भी गलत निर्णय ले बैठते हैं? क्यों समझ होने के बाद भी मन आकर्षण और विरोध में उलझ जाता है? क्या भ्रम केवल जानकारी की कमी है? या कोई ऐसा कर्म है जो सही और गलत की पहचान को अंदर से डिगा देता है? जय जिनेन्द्र। नई अध्ययन-आधारित श्रृंखला “जैन दर्शन — कर्म और हमारी समझ” के छठे भाग (Ep.102) में आपका स्वागत है। पहले भागों में हमने कर्म की मूल परिभाषा, आठ प्रकारों की संरचना, और ज्ञानावरण, दर्शनावरण तथा वेदनीय कर्म को समझा था। अब इस छठे भाग (Ep.102) में हम उन आठ मुख्य कर्मों में से सबसे केंद्रीय कर्म का अध्ययन कर रहे हैं — मोहनीय कर्म — सही जानते हुए भी भ्रम क्यों बना रहता है। • यहाँ एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है — यदि आत्मा का स्वभाव ज्ञान और दर्शन है, तो फिर निर्णय लेते समय भ्रम क्यों उत्पन्न होता है? क्या यह केवल मन की कमजोरी है? या मोह का प्रभाव? इस भाग में हम यह समझने का प्रयास करेंगे — शुरुआत 00:00 [01:30] मोहनीय कर्म क्या है? [03:25] ज्ञान और आचरण के बीच की दूरी (Cognitive Dissonance) [05:44] मोहनीय कर्म के २ मुख्य भेद: दर्शन मोहनीय और चारित्र मोहनीय [07:33] दर्शन मोहनीय का जीवंत उदाहरण [08:21] चारित्र मोहनीय का जीवंत उदाहरण [10:23] कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) का आचरण पर प्रभाव [14:31] ज्ञान और मोह का एक साथ अस्तित्व (उपशम और क्षय) [19:03] 'समयसार' की दृष्टि: आत्मा का तादात्म्य (Identification) [23:19] निश्चय दृष्टि और व्यवहार दृष्टि का भ्रम [27:17] मोहनीय कर्म सभी कर्मों का 'राजा' क्यों है? [30:58] आध्यात्मिक प्रगति में मोह की रुकावट [33:48] मोह के कम होने (क्षीण होने) के प्रारंभिक संकेत [37:50] धन्यवाद जय जिनेंद्र यह भाग मोहनीय कर्म की प्रकृति और उसके प्रभाव तक सीमित है। आगे के भागों में हम आयु, नाम, गोत्र और अंतराय कर्म को क्रमबद्ध रूप से समझेंगे। 📚 शोध व स्रोत (Research & References): इस पूरे भाग में मुख्य रूप से इन ग्रंथों का उपयोग किया गया है — • तत्त्वार्थसूत्र — आचार्य उमास्वामी जी • समयसार — आचार्य कुन्दकुन्द जी • नियमसार — आचार्य कुन्दकुन्द जी किसी भी आधुनिक मनोविज्ञान, अन्य दर्शन या बाहरी सिद्धांत का उपयोग नहीं किया गया है। 🎧 Podcast Series Info: श्रृंखला: Jain Darshan — Karm aur Hamari Samajh भाग: 6 (Ep.102) 🔹 Presented by: Rushabh Jain & Jinvani Shorts 🔹 Research & Script: Jain Shastras based study 🔸 Narration: AI Voice (Directed by Rushabh Jain) 🔸 Editor: Rushabh Jain ✅ 100% Original content — researched, written & produced by our team. यह प्रस्तुति हमारे स्वयं के अध्ययन और मनन पर आधारित है। हम अभी सीख रहे हैं और जैन दर्शन को सरल भाषा में क्रमबद्ध रूप से समझने का प्रयास कर रहे हैं। 📅 अगला भाग: आयु कर्म — जीवन की अवधि किस आधार पर बनती है जुड़े रहिए इस अध्ययन-यात्रा के साथ। जय जिनेन्द्र। #MohaniyaKarm #JainDarshan #KarmSiddhant #JinvaniShorts #HindiPodcast