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शिव विवाह का प्रसंग भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के सबसे मनमोहक वृत्तांतों में से एक है। यह केवल दो देवताओं का मिलन नहीं, बल्कि प्रकृति (पार्वती) और पुरुष (शिव) के एकाकार होने की कथा है। यहाँ शिव विवाह के मुख्य चरणों का संक्षिप्त और सुंदर वर्णन है: 1. माता पार्वती की कठिन तपस्या सती के आत्मदाह के बाद, उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। शिव को पुनः पति के रूप में पाने के लिए उन्होंने हज़ारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति इतनी प्रगाढ़ थी कि उन्हें 'अपर्णा' (जिन्होंने पत्ते खाना भी छोड़ दिया हो) कहा गया। अंततः भगवान शिव उनकी परीक्षा लेने के बाद विवाह के लिए तैयार हुए। 2. अनूठी बारात का आगमन जब विवाह का दिन आया, तो भगवान शिव की बारात निकली। यह इतिहास की सबसे अनोखी बारात थी: बाराती: देवता, गंधर्व, यक्षों के साथ-साथ भूत, प्रेत, पिशाच, डाकनी-शाकिनी और जंगली जानवर भी शामिल थे। शिव का स्वरूप: शरीर पर भस्म, गले में नागों का हार, जटाओं में गंगा और मस्तक पर चंद्रमा। वे बैल (नंदी) पर सवार थे। 3. मैना माता का मोहभंग और बोध जब पार्वती की माता मैना ने शिव के इस भयानक रूप को देखा, तो वे डर गईं और उन्होंने अपनी पुत्री का हाथ देने से मना कर दिया। तब भगवान शिव ने अपना अत्यंत सुंदर 'चंद्रशेखर' स्वरूप प्रकट किया। उनकी आभा देख कर सभी चकित रह गए और मैना माता ने सहर्ष विवाह स्वीकार किया। 4. शुभ विवाह संस्कार हिमालय की नगरी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। ब्रह्मा जी ने पुरोहित की भूमिका निभाई और विष्णु जी ने भाई के कर्तव्य पूरे किए। इस विवाह ने जगत को यह संदेश दिया कि प्रेम में बाहरी रूप नहीं, बल्कि आंतरिक निष्ठा और गुण महत्वपूर्ण होते हैं। इस प्रसंग की मुख्य विशेषताएं #महादेवगौरा / 1keyqwjx1r / 1n3vyfeip4 • I Built My Dream Home For • Unveiling the Divine Essence of Gokul • Inside The Most Extravagant Temple in India • The Great Khichdi Mela: A Feast for the Ma...