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क्रायोजेनिक टैंक को आप बाहर से देखेंगे तो यह सामान्य गैस टैंक की तरह दिखता है, लेकिन इसकी बनावट काफी जटिल होती है. इसे एक तरह वैक्यूम बॉटल के सिद्धांत पर तैया किया जाता है. क्रायोजेनिक का मतलब क्या होता है? ये क्रायोजेनिक शब्द ग्रीक, लैटिन और अंग्रेजी भाषाओं के संयोजन से बना है. ग्रीक शब्द क्रिए को लैटिन भाषा में क्रायो समझा जाता है, जिसका मतलब है, बहुत ठंडा. अंग्रेजी में क्रायोजेनिक का मतलब होता है- बेहद ठंडा रखने वाला. यानी क्रायोजेनिक टैंक का मतलब हुआ- बहुत ठंडा रखने वाला पात्र या टंकी. क्या होता है क्रायोजेनिक टैंक? यह एक ऐसा टैंक होता है, जिसमें ऐसे गैस रखे जाते हैं, जिन्हें बहुत अधिक ठंडा रखना जरूरी होता है. जैसे लिक्विड ऑक्सीजन, लिक्विड हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, हीलियम वगैरह. लिक्विड ऑक्सीजन बहुत ज्यादा ठंडी होती है. क्रायोजेनिक टैंक में उन गैसों को रखा जाता है, जिनका उबलने का स्तर -90 से अधिक होता है. ऑक्सीजन को टैंक के अंदर माइनस 185 से माइनस 93 के टेंपरेचर में रखा जाता है. क्रायोजेनिक टैंक न हों तो लाखों लोगों की जिंदगियां संकट में आ जाएंगी. अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति ही नहीं की जा सकेगी और हर दिन होनेवाली मौतों के आंकड़ें और ज्यादा भयावह होंगे. ट्रांसपोर्टेशन वाले टैंक अस्पतालों वाले टैंक से कितने अलग? क्रायोजेनिक टैंक दो तरह के होते हैं. स्थाई और अस्थाई. अस्पतालों में जो ऑक्सीजन स्टोरेज के लिए टैंक बनाए जाते हैं, वे स्थाई होते हैं. इन टैंकों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अस्थाई टैंक का इस्तेमाल किया जाता है. यानी मोबाइल टैंक या पोर्टेबल टैंक. इन्हें बहुत सुरक्षा की जरूरत होती है, क्योंकि ये खतरनाक भी हो सकते हैं. इनके निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के कई मंत्रालयों और विभागों से सुरक्षा प्रमाण पत्र लेना होता है. देश में क्यों हो गई अचानक इनकी कमी? भारत में कई कंपनियों के पास ऐसे करीब 1500 ट्रांसपोर्ट कैरियर टैंक हैं. हालांकि वर्तमान में 1300 के करीब टैंक ही व्यवहार में हैं. कोरोना महामारी नहीं आती तो आमतौर पर देश में ऑक्सीजन की रोजाना खपत 700 मीट्रिक टन ही होती, जिनके लिए 1300 टैंकर बहुत काफी हैं. पिछले साल की लहर में यह खपत करीब 2,800 मीट्रिक टन रोजाना तक चली गई थी और उपलब्ध टैंकरों से हालात को मैनेज कर लिया गया था. लेकिन इस बार की लहर में ऑक्सीजन की खपत 6000 मीट्रिक टन रोजाना तक पहुंच गई है. ऐसे में इसकी कमी होना लाजिमी है.