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कंचन जी बिहार के दरभंगा जिले में पली बढ़ी हैं। उनका बचपन भी बिहार के एक छोटे से गांव में ही बीता है। शुरुआती पढ़ाई के दौरान कंचन अपने नाना जी के यहां थी और क़रीब 8 वीं तक की पढ़ाई उन्होंने नाना जी की ही देखरेख में पूरी की। कंचन के नाना जी एक अध्यापक थे। एक दिन उनसे मिलने एक कोई सरकारी अधिकारी आया था। कंचन जी उस समय मुश्किल से सिर्फ 10-12 साल की रही होंगी लेकिन वो उस अधिकारी से काफी प्रेरित होती हैं। बाद में कंचन के नाना जी ने बताया कि वो एक IAS अफसर थे और IAS बनना कोई आसान काम नहीं होता। इसके लिए बहुत मेहनत करनी होती है और कई इम्तेहानों से होकर गुज़रना पड़ता है। छोटी सी उम्र से ही कंचन ने इस सपने को अपना ध्येय बना लिया था। लेकिन बीच में हालात कुछ ऐसे बिगड़े कि उन्हें सब कुछ छोड़ कर बैठना पड़ गया। 12 वीं की पढ़ाई पूरी होते होते कंचन जी की शादी हो गई थी। सिविल सेवा का सपना देखने वाली कंचन अब सामाजिक जिम्मेदारियों में उलझने लगी थी। जल्दी शादी होने के कारण पढ़ाई लिखाई से भी नाता टूटने लगा था। पहले बच्चे और फिर कुछ हेल्थ इश्यूज कंचन जी को उनके सपने से दूर करने लगे । इन सब के बीच देखते-देखते क़रीब 10 साल बीत गए। अब न तो वो बच्चों को छोड़ सकती थी और न ही एक बहु होने के नाते अपनी जिम्मेदारियों को। पारिवारिक जीवन से लौटकर वापस स्टूडेंट बनना अब कंचन जी के लिए काफी मुश्किल था। लेकिन कंचन जी के भीतर मौजूद उनका आत्मविश्वास हमेशा ही हिलोरे मारा करता था। सिविल सेवा में आने का उनका सपना अक्सर ही उन्हें देर रात तक सोने नहीं देता था। आखिरकार जब वो अपनी मुश्किलों को भूल कर आगे बढ़ी तो तब तक लगभग 13 साल बीत चुके थे। घर-परिवार वालों को समझाने के बाद कंचन जी ने ओपन यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया और ग्रेजुएशन के दौरान से ही शुरू की अपनी असली पढ़ाई। इतने लम्बे गैप के बावजूद कंचन जी ने खुद को मानसिक रूप से मज़बूत रखा और अपने हौंसले के बल पर आगे बढ़ी। यहां तक आते आते कंचन जी की उम्र भी काफी ज़्यदा हो गई थी। उनके पास अब ज़्यदा मौका नहीं बचा था। इसलिए उन्हें सब कुछ बहुत जल्दी ही हांसिल करना था। बच्चे थोड़ा बड़े हुए तो कंचन जी अपने पति के साथ रहने लगी। कंचन जी के पति सेना में है जिसके कारण अक्सर ही उनकी पोस्टिंग अलग-अलग जगहों पर होती रहती। इन सब के चलते भी कंचन जी की पढ़ाई काफी बाधित होती थी। उन्हें अब सचमुच में किसी सही मार्गदर्शक की ज़रूरत थी जो उनके सपनों को उड़ान दे सके। कंचन जी को हमेशा इस बात का मलाल रहता कि काश उनके पति की पोस्टिंग इलाहाबाद में हो जाती तो अपनी पढ़ाई और बेहतर कर ले जाती। वो हमेशा इस बात के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी करती और आखिरकार उनकी ये मुराद पूरी भी हो गई। कुछ दिन बाद कंचन जी पति की पोस्टिंग इलाहाबाद में हो जाती है। जोकि कंचन जी के लाइफ का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है। इलाहाबाद आकर उन्हें जिस मार्गदर्शक की ज़रूरत थी वो कंचन जी को थोड़े ही दिन बाद मिल गई। कंचन जी 2017 में इलाहबाद आते ही ध्येय के संपर्क में आईं। जहां उन्हें अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट इतिहास में ध्येय के विजय वेद सर का सबसे ज़रूरी सहयोग मिला। साथ ही ध्येय IAS ही वो माध्यम था, जिसने कंचन जी के बिखरे ज्ञान को समेट कर उनकी मंजिल के लिए रास्ता दिखाया। कंचन झा का अभी कुछ दिन पहले आये BPSC रिजल्ट में SDM के तौर पर चयन हुआ है। वो मानतीं हैं कि उनके इस सफर में ध्येय IAS का अप्रतिम योगदान है। क्यूंकि वो अपने ध्येय को बिना ध्येय तक पहुंचे हासिल नहीं कर सकती थी। कंचन झा आज उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो अपने असफलता के लिए सिर्फ किस्मत को दोष देते हैं। जबकि ऐसे समय में चुनौतियों का मुकाबला कंचन जी जैसे आगे बढ़ कर करने की ज़रूरत होती है। कंचन जी के बारे में एक और सबसे ज़रूरी बात ये है कि वो इस बार IAS परीक्षा का भी इंटरव्यू भी दे रहीं हैं। ध्येय फैकल्टी कामना करता है कि आप सिविल सेवा के सबसे प्रितिष्ठित पद के लिए भी चयनित हों क्यूंकि असल मायनों में यही आपका आख़िरी लक्ष्य है। #SDM #PCS #BPSC