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असहयोग आन्दोलन क्यों हुआ ❓/उद्देश्य/महत्व/विशेषता/ hit On UPSC।Non-cooperation movement of mahtma gandhi #facts #NewIAS about video, ब्रिटिश सरकार के नियमों का बहिष्कार करने और भारत में पूर्ण स्वराज को लागू करने के लिए महात्मा गांधी द्वारा वर्ष 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू किया गया था। 1922 में यह आंदोलन समाप्त हो गया।. हमारे सामने बहुत सारे प्रश्न उठाता है जैसे असहयोग आंदोलन क्यों हुआ ? और इसके क्या कारण थे । और आंदोलन क्यों बंद किया गया? आंदोलन का महत्व क्या था ? और आंदोलन प्रभाव क्या था ? आंदोलन की विशेषताएं क्या थीं? आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था? इन सब सवालों का जवाब जानने से पहले हमे समझना होगा की असहयोग का मतलब क्या होता है । Simple भाषा कहे तो असहयोग का मतलब किसी को सहयोग करना बंद कर देना यानी किसी से नाराज हो जाना और उसका साथ देना बंद कर देना । यही हमारे साथ भी हुआ जब प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था तब ब्रिटिश सरकार ने भारतीय को युद्ध में साथ देने को कहा और भारतीयों ने सेना में भर्ती होकर साथ भी दिया यह सोंचकर की हमे अंग्रेजी शासन से आजादी मिल जाएगी । लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ, हमे कुछ नही मिला इस सहयोग से, बदले हम भारतीय को और भी कठिनाइयों और मुस्किलो का सामना करना पड़ा ,जैसे - 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड जिसमे जनरल o डायर ने हजारों लोगो पर गोली चलवा दी और बहुत सारे भारतीयों की जान चली गई और यही सजा मिला हमे सहयोग करने का । इसके साथ एक और घटना जिसे हम रॉलेट एक्ट के नाम से जानते है इसे हम काला कानून भी कहते हैं जिसमे पुलिस किसी को भी सक के आधार पर गिरफ्तार कर सकती थी भारतीय क्रांति को दबाने के लिए । तब भारतीय क्रांतिकारियों ने समझ गया कि अब अंग्रेजो को सहयोग करने से काम नहीं चलेगा ।हमे एक साथ मिलकर विद्रोह करना ही पड़ेगा, तब महात्मा गांधी ने अहिंसा के रास्ते पर चलकर असहयोग आंदोलन शुरू किया । अहिंसा का मतलब हम हिंसा यानी मारपीट नही करेंगे । और तब भारतीय क्रांतिकारियों ने एक साथ मिलकर अंग्रेजी चीजों को बहिस्कार करना शुरू कर दिया जैसे - गांधीजी के कहने पर वकीलों ने न्यायलय जाना छोड़ दिया । विधार्थियो ने अंग्रेज़ो का स्कूल जाना छोड़ दिया । नाई,धोबी,मोची,बावर्ची,ने अंग्रेज़ो का काम करना बंद कर दिया । लोग अंग्रेजी वस्तुओ को खरीदना छोड़ दिए और दुकानदार उसे बेचना छोड़ दिया और उपाधियों, सम्मानों को लौटा दिया गया विधान परिषद का बहिष्कार। वकीलों द्वारा कानूनी अदालतों का बहिष्कार। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार और स्कूल और कॉलेजों से बच्चों की वापसी। ब्रिटिश माल का बहिष्कार। इससे अंग्रेजो को भरी नुकसान हुआ किंतु यह आंदोलन आजादी नहीं दिला सका । अब चलिए देखते है इस आंदोलन को बंद क्यों कर दिया गया । इस आंदोलन में जेल जाने वाले पहले पुरुष cr दास और पहली महिला बसंती देवती थी । 5 फरवरी 1922 को गोरखारपुर के चौड़ा चौड़ी कांड में 22 पुलिस वालो को जिंदा जला दिया गया और इस घटना के समय गांधी जी गुजरात में थे और इन्होंने इस हिंसा से आहत होकर 12 फरवरी 1922 को यह आंदोलन स्थगित कर दिया और महात्मा गांधी के इस निर्णय से पूरे भारत में विद्रोह हुआ । सुभाष चंद्र बोस ने कहा कि जब जनता का उत्साह अपने चरम पर था तो गांधी जी द्वारा आंदोलन को स्थगित करना एक मूर्खता पर निर्णय था और 10 मार्च 1922 को जनता को भड़काने के आरोप में गांधीजी को 6 वर्ष जेल की सजा हुई । और 1924 में गांधी जी को खराब स्वास्थ के कारण जेल से रिहा कर दिया गया ।