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दिव्यांग कोच में ‘राजा’ की तरह लेटा था बंदा, जब RPF वाले के सामने खुला राज, तो बोला- टांग में सरिया डला है आजकल लोग अपने आप को इतना होशियार समझने लगे है कि वह एक बार को तो पुलिस को भी छकाने की कोशिश करते हैं। लेकिन पुलिस की भी तो ऐसे ही दिमाग वालों को पकड़ने की होती है। ऐसे में इंटरनेट पर वायरल एक वीडियो में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कार्यरत RPF जवान भी एक ‘तेजा’ को पकड़ते हैं। दरअसल, बंदा बेटिकट, बिना प्रमाण पत्र के ट्रेन के दिव्यांग कोच में घुसा होता है। न सिर्फ वो घुसा होता है, बल्कि दिव्यांग कोच में मौजूद अपर बर्थ पर चौड़ा होकर लेटा भी हुआ होता है। उसे लगता है कि यहां कोई थोड़ी आएगा! लेकिन फिर तोड़ी देर बाद RPF सब-इंस्पेक्टर रिकी रविंद्र राजावत वहां पहुंचते है। जिस ठाठ-बाट के साथ बंदा अपर बर्थ पर लेटा होता है, उसे देखकर कोई भी नहीं कह सकता कि वो दिव्यांग होगा। ऐसे में पुलिस जब उससे सवाल करना शुरू करती है, तो सारा राज खुल जाता है। RPF जवान जैसे ही दिव्यांग कोच के अंदर घुसता है, उसे अपर बर्थ पर एक आदमी टांग पर टांग पर रखकर लेटा हुआ दिखता है। जो कान में ईयरफोन लगाकर फोन देख रहा होता है। उसे देखकर कही से नहीं लगता कि उसे शरीर में कोई समस्या होगी। मगर फिर भी वह दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित बोगी में जबरदस्ती घुसा होता है। खैर, RPF जवान जब ‘इसमें कौन-कौन विकलांग है’ पूछते हुए बोगी के अंदर घुसता है। तब उसकी नजर बंदे पर पड़ती है और वह उसे हिलाकर पूछता है कि ‘क्या स्थिति है?’ इसके जवाब में बंदा कहता है कि ‘टांग टूटी है सर, सरिया लगा है।’ बंदे के Excuse (बहाने) को सुनने के बाद जब पुलिस वाला उससे दिव्यांग होने का प्रमाण पत्र मांगता है, तो वह कहता है कि उसके पास नहीं है। फिर टिकट के बारे में पूछने पर कहता है कि ‘टिकट लिया नहीं है, जल्दी के चक्कर में।’ बस इतना सुनने के बाद पुलिसवाला कहता है कि ‘आओ नीचे आ जाओ भाईसाहब, टिकट आपने लिया नहीं है और सीट घेरकर लेट गए हो।’ आगे बंदा पुलिस के टोकने पर यह भी कहता है कि उसे नहीं पता था कि ये दिव्यांग कोच है। खैर, आगे बंदा पुलिस को कहता है कि वो अगले स्टेशन पर टिकट ले लेगा। लेकिन पुलिसवाला उसे घर जाकर टिकट खरीदने को कहता है और ट्रेन से उतरने का इशारा करता है। दिव्यांग कोच में कोई भी नहीं जा सकता है। आइए जानते है बिना किसी अस्मर्थता के दिव्यांग कोच में घुसने वालों पर रेलवे नियम के मुताबिक क्या एक्शन हो सकता है? दिव्यांग कोच में बेटिकट पैसेंजर्स और ऐसे यात्री जिन्हें कोई अस्मर्थता नहीं है। उनका घुसना रेलवे नियमों के विरुद्ध है। ऐसा करते हुए पकड़े जाने पर रेलवे केस रजिस्टर करने से लेकर फाइन भी लगा सकती है। ऐसा करने के पीछे की वजह असल दिव्यांग यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिक्ता देना है। रेलवे एक्ट 1989 के तहत, सेक्शन-155, सेक्शन 162 और सेक्शन 137 के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाती है। जो आरक्षित डिब्बों में बिना अनुमित के घुसे पैसेंजर्स को पकड़ने के लिए बनाया गया है।