У нас вы можете посмотреть бесплатно 👑 श्रीमद्भागवत महापुराण: महाराज प्रियव्रत की कथा || पंचम स्कंध, पहला अध्याय || или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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स्वायम्भुव मनु के दो पुत्र थे—उत्तानपाद (जिनके वंश की कथा हमने चतुर्थ स्कंध में देखी) और प्रियव्रत। प्रियव्रत जन्म से ही विरक्त थे और नारद जी के उपदेश से भक्ति में लीन रहना चाहते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 🏛️ ब्रह्मा जी का आगमन और राज्य का आदेश प्रियव्रत राज्य नहीं करना चाहते थे, वे एकांत में भजन करना चाहते थे। तब स्वयं ब्रह्मा जी हंस पर सवार होकर उनके पास आए और उन्हें समझाया कि गृहस्थ आश्रम में रहकर भी अनासक्त भाव से भक्ति की जा सकती है। ब्रह्मा जी की आज्ञा मानकर प्रियव्रत ने राजपाट संभाला और 'बर्हिष्मती' से विवाह किया। ☀️ सात द्वीपों का निर्माण महाराज प्रियव्रत का प्रताप ऐसा था कि जब सूर्य देव सुमेरु पर्वत के पीछे जाते थे और पृथ्वी पर अंधेरा होता था, तो प्रियव्रत को यह अच्छा नहीं लगा। उन्होंने अपने अत्यंत वेगवान रथ पर सवार होकर सूर्य के पीछे दौड़ लगाई और अपनी रथ की लीक (पहियों के निशान) से सात गहरे गड्ढे बना दिए, जो बाद में सात समुद्र बने और उनके बीच की भूमि सात द्वीप (जैसे जम्बूद्वीप आदि) कहलाई। 🧘 पुनः वैराग्य हजारों वर्षों तक न्यायपूर्वक शासन करने के बाद, प्रियव्रत को लगा कि वे मोह में फंस रहे हैं। उन्होंने तुरंत अपना सारा राज्य अपने पुत्रों में बांट दिया और पुनः आत्म-चिंतन और तपस्या में लग गए। #DivyaKathavani #SrimadBhagavatam #Priyavrat #Creation #HinduCosmology #SpiritualJourney #VedicHistory #BrahmaJi #SevenIslands #Bhakti #SanatanDharma #Adhyatma #BhagwatKatha #shritaragirimaharaj #amitmaharaj #shivmandirnigana #nigana_dham #श्रीमद्भागवतगीता #भगवदगीता #GeetaKatha #कृष्णउपदेश #कर्मयोग, #जीवनदर्शन