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उज्जैन की शिप्रा नदी औऱ रामघाट का इतिहास।History of Shipra River and Ramghat of Ujjain बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन उज्जैन में बहने वाली शिप्रा नदी, जहां पर हर 12 वर्ष बाद सिंहस्थ कुंभ का आयोजन किया जाता है।जी हां कुंभ विश्व का सबसे बड़ा मेला है। एक कथा के अनुसार शिप्रा नदी विष्णु जी के रक्त से उत्पन्न हुई थी। ब्रह्म पुराण में भी शिप्रा नदी का उल्लेख मिलता है। #शिप्रा_नदी #ramghat #shiprariver #ramghat_ujjain #रामघाट #ujjain_tourism शिप्रा नदी की उत्पत्ति के बारे में हिन्दू धर्मग्रंथों में एक पौराणिक कथा का उल्लेख मिलता है। बहुत समय पहले भगवान शिव ब्रह्म कपाल लेकर, भगवान विष्णु से भिक्षा मांगने के लिए पहुंचे। भगवान विष्णु ने तब उन्हें अंगुली दिखाते हुए भिक्षा प्रदान की। इससे भगवान भोलेनाथ नाराज हो गए और उन्होंने तुरंत अपने त्रिशूल से विष्णु जी की उस अंगुली पर प्रहार कर दिया।और अंगुली से रक्त की धारा बह निकली। जो विष्णुलोक से सीधे धरती पर आ पहुंची। और इसी तरह यह रक्त की धार, शिप्रा नदी में परिवर्तित हो गई। क्षिप्रा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के महू छावनी से लगभग 17 किलोमीटर दूर जानापाव की पहाडिय़ों से माना गया है। और इसके साथ ही यह स्थान भगवान विष्णु के अवतार भगवान परशुराम का जन्म स्थान भी माना गया है। भौगोलिक घटनाओं के अनुसार कहा जाता है कि उत्तर में पहाड़ है , जहां किसी भी नदी का विपरीत दिशा में बहना असंभव है , मगर शिप्रा नदी उत्तर दिशा की ओर बहती है ओर आगे जाकर यह नदी नर्मदा में मिल जाती हैं। शिप्रा नदी के किनारे पर स्थित घाटों का भी पौराणिक महत्व है। जिनमें से यह रामघाट एक मुख्य घाट माना जाता है।यह सबसे प्राचीन स्नान घाट है, जिस पर कुम्भ मेले के दौरान श्रद्धालु स्नान करना अधिक पसन्द करते हैं। यह घाट हरसिद्धि मंदिर के समीप स्थित है। ऐसा कहा जाता हैं कि प्राचीन भारतीय साहित्य परवर्ती काल में रामचन्द्र बाबा शेणवी ने अठारहवीं शती के पूर्वार्ध में शिप्रा तट पर महाकाल के वर्तमान मन्दिर सहित विभिन्न मंदिर और रामघाट तथा नृसिंह घाट आदि का निर्माण अथवा जीर्णोद्वार करवाया। ऐसा कहा जाता हैं की भगवान श्रीराम ने स्वयं यहाँ आकर अपने पिता दशरथ का श्राद्धकर्म और तर्पण इसी घाट पर किया था। इसके अलावा भी रामघाट पर कई आयोजन होते हैं सावन महीने में भक्तों के जनसैलाब सहित चांदी की पालकी में बाबा महाकाल की सवारी नगर भ्रमण करने के पश्चात इसी घाट पर पहुंचती है यहाँ पर बाबा महाकाल का अभिषेक करवाया जाता हैं। Check Other Video also: - यहाँ से महाभारत के युद्ध को देखते थे भीष्म पितामह | Bhishm Pitamah Temple Kurukshetra Narkatari: • यहाँ से महाभारत के युद्ध को देखते थे भीष्म... Bhagwat Geeta Saar - Jyotisar Kurushetra कुरुक्षेत्र जहां कृष्ण भगवान ने गीता का उपदेश दिया था: • Bhagwat Geeta Saar - Jyotisar Kurushetra क... महाभारत शुरू होने से पहले इस भद्रकाली शक्तिपीठ में पहुंचे भगवान कृष्ण। Bhadrakali Shaktipeeth: • महाभारत शुरू होने से पहले इस भद्रकाली शक्त... महाभारत का साक्षी - स्थानेश्वर महादेव मंदिर कुरुक्षेत्र। Sthaneshwar Mahadev Temple Kurukshetra: • महाभारत का साक्षी - स्थानेश्वर महादेव मंदि... ब्रह्म सरोवर-कुरुक्षेत्र -यहाँ स्नान करने मात्र से मिलता है अश्वमेघ यज्ञ करने जितना पुण्य Kurushetra: • ब्रह्म सरोवर-कुरुक्षेत्र -यहाँ स्नान करने ... Top 10 Tourist Places to Visit in Kurukshetra | कुरुक्षेत्र यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थान।: • Top 10 Tourist Places to Visit in Kurukshe... अब ऐसा दिखता है उज्जैन का ताजमहल,कालियादेह महल उज्जैन की सम्पूर्ण जानकारी | Ujjain Tourism: • अब ऐसा दिखता है उज्जैन का ताजमहल,कालियादेह... बेवफा रानी की वजह से उज्जैन के राजा भर्तहरि बने सन्यासी Bharthari Gufa Ujjain | राजा भर्तृहरि गुफा : • बेवफा रानी की वजह से उज्जैन के राजा भर्तहर...