У нас вы можете посмотреть бесплатно प्राचीन पौराणिक और ऐतिहासिक गौरा देवी मंदिर-देवलगढ़।। देवलगढ़ मंदिर समूह।। गौरजा देवी मंदिर।। или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
देवलगढ़ मंदिर समूह उत्तराखंड के श्रीनगर से 19 किलोमीटर दूर और पर्यटन स्थल खिर्सू से 15 किलोमीटर दूर देवलगढ़ नामक गांव में है। कांगड़ा हिमांचल के राजा देवल ने यह गांव बसाया जिस कारण इसका नाम देवल पड़ा। 1512 ईस्वी में पंवार राजा अजय पाल ने अपनी राजधानी चंदपुरगढ़ी से देवल स्थानांतरित की और यहां एक किला (किला=गढ़ जो 52 गढ़ों में से एक) बनाया जिस कारण यह देवलगढ़ कहलाया। किन्वदंती है कि कुबेर ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। जिसका जीर्णोधार 7 से 8वी सदी के मध्य कराया प्रतीत होता है और फिर राजा अजयपाल द्वारा इसको और भव्य और विशाल बनवाया गया। पहले यह महिश्मर्दनी या महिसासुर मर्दनी पीठ कहलाया जाता था परंतु बाद में देवल द्वार सुमाड़ी के राजीवलोचन काला जी की अगुवाई में यहां पर मां गौरजा देवी या मां गौरा देवी की मूर्ति स्थापना करने के कारण यह गौरा देवी पीठ कहलाया। 14 अप्रैल बैसाखी या बिखौती या बुढा के दिन यहां एक भव्य मेला लगता है जिसमें मां को हिंडोला झुलाया जाता है और आशीर्वाद लिया जाता है। यहां शक्ति या मां पार्वती जिनका अन्य नाम गौरा देवी है, को सर्वोच्च मानने वाली शाक्त परंपरा रही है परंतु 15 सातब्दी के पश्चात गुरुगोरखनाथ के शिष्यों के उत्तर भारत में आगमन पर योगी सत्यनाथ जी के द्वारा नाथ परंपरा की भी स्थापना हुई।