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Noise of Truth Singer:- Jay Lyrics:- Vivek Chandel Music:- D Records Lyrics ये गीत किसी पार्टी के लिए नहीं है… ये गीत कुर्सी के ख़िलाफ़ है। ये गीत धर्म के नाम पर चल रहे धंधे के ख़िलाफ़ है। और जो चुप है… वो भी अपराधी है। हाथों में तिरंगा, पर सोच में गंदगी, देश नहीं दिखता, दिखती सिर्फ़ सत्ता की बंदगी। चुनावों में भगवान, बाद में सब भुला दिए, जनता से ज़्यादा प्यारे, कुर्सी के नशे लिए। मंदिर–मस्जिद, टीआरपी का खेल, सड़क पे जो लड़ें, ऊपर बैठे उन्हें नहीं कोई मेल। टीवी पर शोर है, सच को काट दिया, एजेंडा बिकता प्राइम टाइम में, इंसाफ़ को बांध दिया। सच का शोर है, पर कान बंद हैं, झूठ ज़िंदा है क्योंकि सिस्टम गंदा है। धर्म बेचा जा रहा, नोटों का ज़ोर है, देश मेरा ज़िंदा है, पर सिस्टम चोर है। धोखाधड़ी लिखी हर योजना के साथ, वादे पोस्टर पर हैं, हक़ीक़त में लात। भ्रष्टाचार इतना गहरा, रगों में समाया, बिना पैसे के दफ़्तर बोले — “कल आना भाया।” नशा हाथों में जवानी के, भविष्य पड़ा बीमार, नेताओं के बेटे विदेश में, बस्ती का बेटा लाचार। नशा सस्ता, सपना महँगा, कौन समझे ये दर्द, इलाज से पहले मौत मिलती, सिस्टम बोले — “अगला कर्ज़।” सच का शोर है, पर कान बंद हैं, झूठ ज़िंदा है क्योंकि सिस्टम गंदा है। न्याय लाइन में खड़ा, हाथ में दूर है, देश मेरा ज़िंदा है, पर सिस्टम चोर है। बेटी घर से निकले, माँ की साँस थम जाए, कपड़ों पर सवाल, गुनहगार छूट जाए? कल तक मोमबत्ती, आज नया शोर, न्याय की फ़ाइल बोले — “मामला अभी और।” बड़े-बड़े घोटाले, बड़े-बड़े नाम, तारीख़ पर तारीख़, सबूत भी हो जाएँ थकान। अदालत के बाहर भीड़, अंदर खामोशी, इंसाफ़ भी शायद बोले — “मेरी भी है मजबूरी।” ना हिंदू, ना मुस्लिम, ना वाम, ना दाहिना, मैं भूख, दर्द और सच की आवाज़ हूँ सीधा। जो सवाल करे वो देशद्रोही कहलाए, जो लूट के खाए वही देशभक्त बन जाए? मैं बिकता नहीं, मैं चुप नहीं रहूँगा, ये माइक मेरी तलवार है, सच ही कहूँगा। कल का भारत जब पूछेगा हिसाब, तुम कहना — हमने बोला था, पर सुना नहीं आपने जनाब। सच का शोर है… अब गूँजेगा शहर, झूठ का महल एक दिन ढहेगा बिखर। देश मेरा मेरा है, ये फैसला ज़ोर से, या लिखा जाएगा इतिहास — “लूट लिया गया चोर से।”