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श्रीकृष्णाय वयं नुमः। श्रीस्वामीजी ने बताया गूढ़ अर्थ। | Swami Shri Raghavacharya Ji Maharaj Swami Shri Raghavacharya Ji Maharaj Official YouTube Account अध्यक्ष — श्रीरामलला सदन देवस्थान ट्रस्ट, रामकोट अयोध्या 🚩 ⇝⇝⇝⇝✹✹✹✹✹✹✹⇝⇝⇝⇝ 🌸 जानिए — “श्रीकृष्णाय वयं नुमः” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि पूर्ण शरणागति का वैदिक उद्घोष क्यों है? इस मंत्र में ‘मैं’ कहाँ विलीन हो जाता है? सनातन परंपरा में कुछ वाक्य मंत्र बन जाते हैं— और कुछ मंत्र जीवन की दिशा बदल देते हैं। “श्रीकृष्णाय वयं नुमः” ऐसा ही एक गूढ़, गंभीर और आत्मसमर्पण से भरा महावाक्य है। स्वामीजी कहते हैं— “जहाँ ‘वयं’ आया, वहाँ ‘अहम्’ समाप्त हो गया। और जहाँ ‘नुमः’ आया, वहाँ जीवन प्रभु को अर्पित हो गया।” 📜 मंत्र-वाक्य श्रीकृष्णाय वयं नुमः। 📖 इस प्रवचन में जानिए— ✨ 1. ‘श्रीकृष्णाय’ — परम तत्त्व का संकेत • श्री — ऐश्वर्य, करुणा और कृपा • कृष्ण — पूर्ण ब्रह्म, सर्वाकर्षक तत्त्व 👉 यह संबोधन किसी देवता को नहीं, संपूर्ण परम सत्य को है। ✨ 2. ‘वयं’ — अहंकार का विसर्जन • ‘मैं’ नहीं, ‘हम’ • व्यक्तिगत नहीं, समर्पित चेतना स्वामीजी बताते हैं— “वयं कहना अहंकार का त्याग है।” ✨ 3. ‘नुमः’ — पूर्ण समर्पण • नमन नहीं, अर्पण • देह, मन और प्राण का समर्पण 👉 ‘नुमः’ का अर्थ है— अब कुछ भी मेरा नहीं रहा। ✨ 4. यह वाक्य क्यों साधना है, केवल उच्चारण नहीं? • इसमें मांग नहीं • इसमें अपेक्षा नहीं • इसमें सौदा नहीं स्वामीजी कहते हैं— “कृष्ण को पाने के लिए कुछ माँगना नहीं, सब छोड़ना पड़ता है।” ✨ 5. श्रीकृष्णाय वयं नुमः — जीवन का सूत्र • कर्म कृष्ण के लिए • फल कृष्ण को • कर्ता भाव का त्याग 👉 यही गीता का सार है। 🌸 जीवनोपदेश : 👉 यह वाक्य जप नहीं— दृष्टि परिवर्तन है। 👉 जहाँ ‘वयं नुमः’ आ गया, वहाँ चिंता नहीं टिकती। 👉 यह मंत्र सिखाता है— जीवन जीयो, पर स्वामित्व छोड़ दो। 👉 स्वामीजी कहते हैं— “जो ‘श्रीकृष्णाय वयं नुमः’ हृदय से बोल देता है, कृष्ण स्वयं उसका जीवन संभाल लेते हैं।” 👉 यही है इस दिव्य वाक्य का गूढ़ अर्थ। 📌 Official Links: 👉 Subscribe करें और जुड़े रहें: https://bit.ly/3kS8Kcr ✦ इस चैनल पर आपको मिलेगा: 🔸 श्रीकृष्ण तत्त्व और गीता रहस्य 🔸 भक्ति, शरणागति और वैराग्य 🔸 श्रीमद्भागवत कथा 🔸 जीवन को भीतर से बदलने वाले प्रवचन 📞 संपर्क सूत्र: 9616703209 | 9415370651 📜 About Swami Shri Raghavacharya Ji Maharaj & Ramlala Sadan: Shrimadjagadguru Swami Dr. Raghavacharyaji, Peethाधीश्वर – Shridham Ramvarnashram, Ayodhya; Sarvarाहकर Mahant – Shri Ramlala Sadan Devasthan Trust. ✨ संस्थाएँ: 🔸 Shridham Ramvarnashram, Ayodhya 🔸 Shri Ramlala Sadan Devasthan Trust 🔸 Shri Hanuman मंदिर, Ramkot, Ayodhya 🔸 Shriram Janki Mandिर, Khodiya Bazar, Gonda 🌐 Official Profiles: YouTube | Facebook | Instagram | Twitter | Website | Android App Digital Partner: Team Anish Sahasrabudhe 🙏 **“जहाँ शब्द हैं— श्रीकृष्णाय वयं नुमः, वहाँ जीवन कहता है— अब मैं नहीं, केवल कृष्ण हैं।”**