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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गांधी युग (1915–1948) का विशेष महत्व है। 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद Mahatma Gandhi ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दी। इस दौर में कई महत्वपूर्ण आंदोलन हुए जैसे – Champaran Satyagraha Kheda Satyagraha Non-Cooperation Movement Civil Disobedience Movement Quit India Movement इन आंदोलनों ने भारत की जनता को एकजुट किया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक शक्तिशाली जन आंदोलन खड़ा किया। इस वीडियो में हम गांधी युग की प्रमुख घटनाओं, आंदोलनों और उनके प्रभाव को सरल भाषा में समझेंगे। 👉 यह वीडियो UPSC, SSC, UPPCS, TET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बहुत उपयोगी है।"इस वीडियो में हम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण चरण 'गांधी युग' (1915-1948) के बारे में विस्तार से जानेंगे। महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद भारत की राजनीति कैसे बदली? चंपारण सत्याग्रह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक की पूरी कहानी और गांधीजी के सिद्धांतों (सत्य और अहिंसा) के प्रभाव को समझने के लिए वीडियो अंत तक देखें।" मुख्य बिंदु: गांधीजी का भारत आगमन (1915) असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन . गांधी युग (1915-1948) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह चरण है जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्य और अहिंसा पर आधारित आंदोलनों ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद, गांधीजी ने चंपारण, असहयोग, सविनय अवज्ञा (दांडी मार्च) और भारत छोड़ो जैसे प्रमुख आंदोलनों के माध्यम से जनता को एकजुट किया। गांधी युग की प्रमुख विशेषताएँ और आंदोलन: शुरुआती सत्याग्रह (1917-1918): भारत में चंपारण सत्याग्रह (1917), खेड़ा सत्याग्रह (1918) और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) से गांधीजी ने अपनी अहिंसक कार्यशैली की शुरुआत की। असहयोग आंदोलन (1920-1922): रौलट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में राष्ट्रव्यापी असहयोग आंदोलन शुरू किया गया, जिसे चौरी-चौरा कांड के बाद वापस ले लिया गया। सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-1934): 1930 के प्रसिद्ध दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) के साथ शुरू हुए इस आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार को बैकफुट पर ला दिया। भारत छोड़ो आंदोलन (1942): गांधीजी ने "करो या मरो" (Do or Die) का नारा दिया, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य के अंत की शुरुआत की। गांधीजी के मुख्य सिद्धांत: गांधीजी की विचारधारा का मूल आधार सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, स्वदेशी, और अस्पृश्यता उन्मूलन था। गांधीजी के इस नेतृत्व काल ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक जनांदोलन में बदल दिया, जिसके कारण 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई